
शुद्ध योग केंद्र के माध्यम से हर उम्र के लोग बच्चे से लेकर वरिष्ठ नागरिक तक नियमित रूप से योग कक्षाओं में भाग ले रहे हैं। यहां तक कि कई प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले रहे हैं। डॉ. मोनिका पाठक ने वर्ष 2016 में इस केंद्र की शुरुआत की थी। शुरुआत में कक्षाएं रघुराज सिंह स्टेडियम में लगाई जाती थीं, लेकिन जगह की कमी के कारण अब उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

डॉ. मोनिका पाठक का कहना है कि योग स्वास्थ्य और अनुशासन से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन सहयोग करे तो और बड़ी संख्या में लोगों को योग से जोड़ा जा सकता है और नागरिकों को स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित किया जा सकता है।

फिलहाल जगह के अभाव के कारण शुद्ध योग केंद्र की कक्षाएं कंपनी गार्डन में लगाई जा रही हैं। लेकिन यहां छोटे बच्चों को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि इस स्थान पर अक्सर लड़के-लड़कियों का जमावड़ा रहता है और यह माहौल बच्चों की शिक्षा के लिए उपयुक्त नहीं है।

इसके अलावा कंपनी गार्डन में आवारा कुत्तों की आवाजाही बनी रहती है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर भी खतरा बना रहता है। वहीं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बच्चों और अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब है। यही वजह है कि अभिभावक लगातार प्रशासन से एक उचित स्थान उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

डॉ. मोनिका पाठक ने बताया कि उनके योग केंद्र से जुड़कर कई बच्चे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जीतकर लौटे हैं। अगर उन्हें एक अच्छा और सुरक्षित स्थान मिलेगा तो न केवल ये बच्चे आगे बढ़ेंगे बल्कि बिलासपुर का नाम भी देशभर में रोशन करेंगे।

अभिभावकों और डॉ. मोनिका पाठक दोनों ने ही प्रशासन से अनुरोध किया है कि शुद्ध योग केंद्र के लिए एक स्थायी और उपयुक्त स्थान प्रदान किया जाए। उनका कहना है कि हर स्तर पर पहल करने के बावजूद प्रशासनिक उपेक्षा के चलते छोटे बच्चों का योग भविष्य खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।




