
बिलासपुर :- रक्षाबंधन के अगले दिन धूमधाम से मनाए जाने वाले पारंपरिक पर्व भोजली का आयोजन इस वर्ष भी पूरे उत्साह और आस्था के साथ हुआ। वार्ड 14 मंगला क्षेत्र में रविवार को विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई और भोजली की परंपरागत रस्में निभाई गईं।सुबह अभिषेक विहार फेस 1, फेस 2, फेस 3 और अभिषेक नगर की महिलाएं, युवतियां और बच्चियां रंग-बिरंगे परिधानों में सजी-धजी शिव मंदिर परिसर में एकत्र हुईं। एक सप्ताह पहले मिट्टी के पात्रों में बोई गई हरी-भरी भोजली को सिर पर सजाकर और थालियों में रखकर महिलाएं मंदिर से शोभायात्रा के लिए निकलीं। पारंपरिक गीत, गाजे-बाजे और तालियों की गूंज के बीच यह शोभायात्रा पूरे मोहल्ले में घूमी, जिसका स्थानीय लोगों ने घरों से निकलकर स्वागत किया।पूरे कॉलोनी का भ्रमण करने के बाद शोभायात्रा तालाब पहुंची, जहां पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धापूर्वक भोजली का जल में विसर्जन किया गया। इसके बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को भोजली भेंट की, जिसे मित्रता का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के तहत महिलाएं भोजली को मित्रों और परिचितों के कानों में लगाकर आपसी प्रेम और सद्भाव का संदेश देती हैं।भोजली पर्व छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। यह न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि सामाजिक रिश्तों और दोस्ती की डोर को भी मजबूत करता है। वर्षों से निभाई जा रही यह परंपरा आज भी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उतने ही उत्साह और उल्लास के साथ जीवंत है।




