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राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर जमीन हड़पने के आरोपों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है अब निगाहें कार्रवाई पर टिकी हैं।

बिलासपुर। जिले के रतनपुर तहसील से राजस्व विभाग से जुड़ा एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि जमीन हड़पने की नीयत से राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत कर नियमों को ताक पर रख दिया। शिकायत में तहसीलदार, पटवारी और तहसील कार्यालय की एक लिपिक पर धोखाधड़ी और कूटरचना के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामला ग्राम रतनपुर का है, जहाँ कई खसरा नंबरों की भूमि पहले स्वर्गीय मोतीचंद जायसवाल एवं अन्य सह-भागीदारों के नाम संयुक्त रूप से दर्ज थी। आरोप है कि मोतीचंद जायसवाल के निधन के बाद उनके हिस्से की जमीन को अवैध रूप से हड़पने की साजिश रची गई।

इसके तहत मृतक का नाम राजस्व रिकॉर्ड से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई शिकायतकर्ता का कहना है कि हल्का पटवारी, तहसीलदार और लिपिक ने आपसी सांठ-गांठ कर स्वर्गीय मोतीचंद जायसवाल का नाम राजस्व अभिलेखों से विलोपित करा दिया। इतना ही नहीं, मृतक को निःसंतान दर्शाते हुए कथित रूप से फर्जी प्रतिवेदन भी तैयार किया गया, जिससे जमीन के अधिकारों में हेरफेर किया जा सके। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित भूमि को लेकर मामला पहले से न्यायालय और उच्च न्यायालय में लंबित है इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए नामांतरण की कार्यवाही कर दी गई। शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों को तत्काल रतनपुर से हटाने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करता है।

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