
बिलासपुर। भगवान राम के नाम पर सड़क जाम और प्रशासनिक अनुमति निरस्तीकरण के कारण इस वर्ष अरपांचल लोक मंच परंपरागत रावण दहन आयोजन से वंचित हो गया। मंच ने कड़ी आपत्ति जताते हुए सोमवार को पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला प्रशासन को प्रतिवेदन सौंपा और अनुमति निरस्त करने के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की। संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि 22 अगस्त 2025 को आवेदन प्रस्तुत कर 2 अक्टूबर 2025 को साइंस कॉलेज मैदान में शाम 5:30 बजे से रात 10 बजे तक रावण दहन कार्यक्रम की अनुमति मांगी गई थी। हालांकि, 2 सितंबर को प्रशासन ने अचानक अनुमति निरस्त कर दी। संस्था ने इस निर्णय को मनमाना और प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध बताया है।

अरपांचल लोक मंच का कहना है कि पिछले पाँच वर्षों से लगातार इसी मैदान में मंच द्वारा ही रावण दहन का आयोजन किया जाता रहा है। यह आयोजन अब स्थानीय जनता की आस्था और परंपरा से जुड़ चुका है। संस्था का आरोप है कि किसी अन्य आवेदक को अनुमति देकर परंपरागत आयोजकों को दरकिनार करना न केवल अनुचित है बल्कि इससे सामाजिक असंतोष और अव्यवस्था की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मंच पूरी तरह से गैर-राजनीतिक और सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था है अब तक कभी भी मंच द्वारा किए गए आयोजनों में अव्यवस्था या शिकायत की स्थिति नहीं बनी है। इसलिए, प्रशासन का निर्णय पारंपरिक आयोजकों के प्रति अन्यायपूर्ण प्रतीत होता है।

अरपांचल लोक मंच ने इस मुद्दे पर अनोखे तरीके से प्रदर्शन भी किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और सर्व हिंदू संगठन से जुड़े लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और हनुमान चालीसा, भजन एवं कीर्तन कर अपनी नाराजगी जाहिर की। इससे माहौल पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंग गया। संस्था ने जिला प्रशासन से मांग की है कि विजयादशमी जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को राजनीति से दूर रखते हुए निष्पक्ष और न्यायसंगत ढंग से अनुमति प्रदान की जाए। मंच का कहना है कि प्रशासन को परंपरा का सम्मान करते हुए रावण दहन की अनुमति वापस लेनी चाहिए और आयोजन की निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। कलेक्टर ने अरपांचल लोक मंच के आपत्ति पत्र पर संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग से चर्चा और मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों की बातें सुनने के बाद ही निष्पक्ष और उचित कार्रवाई की जाएगी, ताकि परंपरा और जनभावनाओं का सम्मान बना रहे।




