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Wednesday, April 1, 2026
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जशक्राफ्ट की जनजातीय मातृशक्ति की सराहना कीकार्तिक जतरा में शामिल हुए सीएम विष्णुदेव साय, आत्मनिर्भरता और गौरव का संदेश

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने झारखंड के गुमला में आयोजित अंतरराज्यीय जन-सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा’ में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की जनजातीय महिलाओं के कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय भी कार्यक्रम में शामिल हुए और जनजातीय सशक्तिकरण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जशपुर की स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं, विशेषकर जशक्राफ्ट से जुड़ी बहनों के कौशल, सृजनशीलता और आत्मनिर्भरता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा बनाए गए आभूषण और पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद महिला सशक्तिकरण के प्रेरक उदाहरण हैं।राष्ट्रपति ने जशपुर वनमंडल के ग्राम कोटानपानी की स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को जनजातीय संस्कृति, परंपरागत कला और आजीविका सशक्तिकरण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से स्थानीय हस्तशिल्प को नई पहचान मिल रही है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति का यह प्रोत्साहन पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि जनजातीय मातृशक्ति का आत्मविश्वास बढ़ाने में जशक्राफ्ट जैसी पहल अहम भूमिका निभा रही है और यह वोकल फॉर लोकल को मजबूती देती है।कार्यक्रम के दौरान जनजातीय हस्तशिल्प, लोककला और स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि दल ने जशपुर की विशिष्ट शिल्प परंपरा का प्रदर्शन कर जनजातीय सशक्तिकरण का संदेश दिया।महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय गौरव दिवस, भगवान बिरसा मुंडा और पंकजराज साहेब कार्तिक उरांव जैसे जननायकों की प्रेरणा से आदिवासी समाज आत्मगौरव और विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बस्तर में नक्सलवाद के कमजोर होने और विकास कार्यों के तेज होने का भी उल्लेख किया।महामहिम ने कहा कि यह अंतरराज्यीय सांस्कृतिक संगम जनजातीय समाज को जोड़ने वाला सेतु है। उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़, झारखंड और पड़ोसी राज्यों के बीच यह सांस्कृतिक एकता शांति, प्रगति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी। कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संदेश और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संबोधन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनजातीय समाज की परंपराएं, कला और आत्मनिर्भरता ही विकास की मजबूत नींव हैं। जशपुर की जनजातीय मातृशक्ति का यह सम्मान न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बनकर उभरा है।

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