Site icon Grand Gumber News

रेलवे रनिंग स्टाफ का 48 घंटे का उपवास आंदोलन खत्म, मांगों पर सरकार से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा चेतावनी समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा और तेज, माइलेज भत्ता और टैक्स खत्म करने की मांग प्रमुख

रेलवे के रनिंग स्टाफ की कार्य स्थितियों, भत्तों और सेफ्टी मानकों को लेकर उठी नाराज़गी अब खुलकर सामने आ गई है। 48 घंटे का शांतिपूर्ण उपवास समाप्त होने के बाद कर्मचारी नेताओं ने अपनी मांगों का विस्तृत ब्यौरा दिया और साफ चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो आंदोलन आगे और कड़ा हो सकता है।रनिंग स्टाफ की दो मुख्य मांगें लंबे समय से लंबित हैं। पहली किलोमीटर भत्ते माइलेज में बढ़ोतरी, जो अन्य कर्मचारियों के टीए और डीए बढ़ने के अनुरूप अब तक संशोधित नहीं हुई। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब अन्य स्टाफ को 50% डीए वृद्धि के बाद स्वतः लाभ मिला है, तो उसी आधार पर रनिंग स्टाफ का माइलेज भी बढ़ाया जाना चाहिए। दूसरी प्रमुख मांग माइलेज पर लगने वाले इनकम टैक्स की समाप्ति है। उनका कहना है कि माइलेज में 70% हिस्सा टीए का होता है जो टैक्स फ्री है, फिर भी टैक्स लगाया जाना अनुचित है।कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि रनिंग स्टाफ की कमी अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। देशभर में लगभग 30,000 पद खाली हैं और कई ज़ोन में 40% से अधिक रिक्तियां हैं। इसका असर सीधे तौर पर लंबी ड्यूटी, रेस्ट की कमी, छुट्टियों के अभाव और बढ़ते मानसिक व शारीरिक तनाव के रूप में सामने आता है। नेताओं ने कहा कि थकान और दबाव दुर्घटनाओं की बड़ी वजह हैं, लेकिन जांच में हमेशा लोको पायलट को दोषी ठहरा दिया जाता है। उन्होंने निष्पक्ष और तकनीकी जांच व्यवस्था की मांग की है।

Exit mobile version