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रेल मजदूर यूनियन ने मजदूर दिवस पर उठाई निजीकरण और वेतन भत्तों की आवाज मजदूरों के हक में गरजी आवाज, यूनियन बोली रेल हमारे सीने पर चलती है, ध्यान दो सरकार

1 मई यानी मजदूरों का दिन। बिलासपुर में रेलवे मजदूरों ने इस दिन को सिर्फ एक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि संघर्ष की याद और अधिकारों की मांग के दिन के रूप में मनाया। रेलवे प्रांगण में रेल मजदूर यूनियन द्वारा मजदूर दिवस का आयोजन किया गया, जहां भारी संख्या में कर्मचारी जुटे। यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, मजदूरों के हक की लड़ाई का प्रतीक है। यूनियन पदाधिकारियों ने मंच से कहा कि मजदूर दिवस साधारण दिन नहीं, बल्कि उन हजारों कुर्बानियों की याद दिलाता है, जिनकी वजह से आज हमें 8 घंटे की ड्यूटी और सप्ताह में एक दिन की छुट्टी का अधिकार मिला।रेलवे मजदूरों ने कार्यक्रम के दौरान अपनी कई समस्याएं सामने रखीं। खासतौर पर निजीकरण को लेकर गहरी नाराजगी जताई गई। उनका कहना था कि रेल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र का लगातार निजीकरण हो रहा है, जिससे कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित होता जा रहा है।यूनियन नेताओं ने यह भी कहा कि रेल कोई प्रशासन ने नहीं बनाई, इसे मजदूरों ने अपने खून-पसीने से खड़ा किया है। चाहे हाड़ कंपा देने वाली सर्दी हो या चिलचिलाती गर्मी मजदूर दिन-रात काम करते हैं, फिर भी उनके कार्य के हिसाब से वेतन और सुविधाएं नहीं मिलतीं।आठवें वेतन आयोग को लेकर भी नाराजगी जाहिर की गई।

यूनियन ने मांग रखी कि आने वाले वेतन आयोग में ट्रेन मैनेजर सहित अन्य रेल कर्मचारियों के साथ छल न किया जाए, जैसा कि पहले कई बार हुआ है। सरकार से अपील की गई कि कर्मचारियों की बात सुनी जाए।रेल मजदूर यूनियन का कहना है कि जब तक मजदूरों को उनका पूरा हक नहीं मिलता, उनकी आवाज यूं ही बुलंद होती रहेगी।उनका साफ संदेश था रेल हमारी रगों से चलती है, इसे बेचना बंद करो। सरकार से अपील है कि वह मजदूरों की बातें सुने और निजीकरण की नीतियों पर पुनर्विचार करे।कार्यक्रम में कुलियों ऑटो चालकों और अन्य श्रमिक वर्गों को भी आमंत्रित किया गया। गार्ड लॉबी के बाहर हुए आयोजन में सभी को शरबत पिलाया गया और एकजुटता का संदेश दिया गया। यह मजदूर एकता का प्रतीक बना, जहां हर किसी ने एक स्वर में अपने हक की बात की।

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