Site icon Grand Gumber News

रेल हादसे की जांच तेज, जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज,सवालों के घेरे में रेलवे की लापरवाही और सिग्नल सिस्टम

बिलासपुर रेल हादसे के बाद अब जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लालखदान के पास हुए इस भीषण टक्कर ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 11 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा घायल होने के बाद अब जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है। मंगलवार शाम लालखदान के पास गेवरारोड से आ रही मेमू ट्रेन, उसी ट्रैक पर खड़ी मालगाड़ी से जा टकराई थी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मेमू का मोटर कोच पूरी तरह चकनाचूर हो गया। यात्रियों को निकालने के लिए इंजन काटना पड़ा, और रेस्क्यू टीम ने रातभर मशक्कत कर शव और घायलों को बाहर निकाला।

हादसे की भयावह तस्वीरों ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है।बुधवार को सीआरएस बी.के. मिश्रा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल की विस्तृत जांच की। टीम ने ट्रैक, सिग्नल सिस्टम, कंट्रोल रूम से संचार, और लोको पायलट के रिकॉर्ड सहित कई तकनीकी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की। जांच के दौरान रेलवे के वरिष्ठ अफसर मौजूद रहे, लेकिन किसी ने भी कैमरे के सामने आने से परहेज़ किया।स्थानीय सूत्रों का कहना है कि हादसे से पहले सिग्नलिंग सिस्टम में खराबी आई थी, जिसकी सूचना कंट्रोल रूम तक पहुंची, लेकिन समय रहते कोई कदम नहीं उठाया गया।

यह भी सामने आया है कि मालगाड़ी के खड़े रहने की जानकारी मेमू ड्राइवर तक नहीं पहुंच पाई, जिससे यह टक्कर हुई। अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर रेलवे का सुरक्षा प्रोटोकॉल कहाँ फेल हुआ।घटना के बाद से रेलवे प्रशासन मौन साधे हुए है, जबकि परिजन और यात्रियों के संगठन खुलेआम रेल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर सिग्नलिंग सिस्टम की समय पर जांच होती और रेलवे कंट्रोल रूम सतर्क रहता, तो ये 11 जिंदगियाँ बच सकती थीं। कई यात्रियों ने बताया कि हादसे के बाद शुरुआती एक घंटे तक मौके पर कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।

अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो आने वाले कुछ दिनों में सामने आएगी। इस रिपोर्ट से ही तय होगा कि दुर्घटना का कारण तकनीकी खराबी थी या मानवीय भूल। हालांकि, घटनास्थल से मिले शुरुआती इनपुट्स साफ इशारा कर रहे हैं कि रेलवे की लापरवाही ने ही इस हादसे को जन्म दिया।वहीं रेल हादसे के बाद विपक्ष लगातार हमलावर है और रेल मंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहा है।वहीं आम लोग पूछ रहे हैं क्या अब भी रेलवे जागेगा।इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर साबित किया है कि जब तक सिस्टम में जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक यात्रियों की सुरक्षा सिर्फ कागजों में सिमटी रहेगी।

Exit mobile version