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रेल हादसे की जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद नया विवाद,लोको रनिंग स्टाफ ने उठाए ऑटो सिग्नलिंग पर सवाल

पिछले दिनों बिलासपुर में हुए रेल हादसे के बाद अब जांच की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। चीफ रेलवे सेफ्टी ने घटना से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ के बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी है। लेकिन अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है — ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने चीफ रेलवे सेफ्टी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि रेलवे के द्वारा लागू की गई ऑटो सिग्नलिंग प्रणाली में कई तकनीकी खामियां हैं। संगठन का कहना है कि कई बार लोको पायलट और असिस्टेंट लोको पायलट ऑटो सिग्नलिंग के संकेतों को लेकर भ्रमित हो जाते हैं, जिससे इस तरह की दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है।संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि लोको पायलटों से अत्यधिक परिश्रम कराया जा रहा है, जबकि रिकॉर्ड में उनके ड्यूटी आवर्स को कम दर्शाया जाता है।इन सबके बीच रनिंग स्टाफ पूरी निष्ठा से काम कर रहा है, लेकिन हादसे के बाद उन्हें ही दोषी ठहराने की कोशिश की जा रही है। ज्ञापन के साथ संगठन ने कई दस्तावेजी सबूत भी प्रस्तुत किए हैं।हमने रेलवे प्रशासन को अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी है। रनिंग स्टाफ को मोहरा बनाना बंद किया जाए और तकनीकी खामियों को सुधारा जाए।”वहीं, मामले पर केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह अधिकारी हो या कर्मचारी। हादसे के बाद जिस तरह से रेल प्रशासन के द्वारा जांच पर तेजी लाई गई उससे तो उम्मीद है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी लेकिन जिस तरह से अब रनिंग स्टाफ एसोसिएशन भी अपनी समस्याओं को लेकर और अधिकारियों की मनमानी को लेकर बातें सामने रख रहा है वह दर्शाता है कि रनिंग स्टाफ और अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल नहीं है जिस दिशा में रेलवे के उच्च अधिकारियों को सामान्य बैठक इस दिशा में बेहतर काम करना होगा।

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