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Monday, April 6, 2026
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रेल हादसे ने छीना सहारा, जिंदगी और मौत से जूझ रहा प्रकाश परिवार की गुहार रेलवे और ठेकेदार दें जवाब, इलाज व मुआवज़े की जिम्मेदारी लें

बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत हुए हादसे ने एक पूरे परिवार की दुनिया अंधकार में धकेल दी है। रतनपुर निवासी प्रकाश बर्मन पिछले चार दिनों से अपोलो अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। परिवार का कहना है कि हादसा रेलवे और ठेकेदार की लापरवाही का नतीजा है। अपोलो में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे गंभीर अवस्था में भर्ती प्रताप बर्मन के परिजनों के मुताबिक प्रकाश हादसे से पहले मेहनत-मजदूरी कर घर चला रहे थे। उसी दौरान रेल विभाग से जुड़े काम के दौरान उन्हें बिजली का करंट लगा और वे बुरी तरह घायल हो गए। गंभीर हालत में उन्हें आनन-फानन में अपोलो अस्पताल लाया गया, जहां उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई है।हादसे के बाद से ही परिवार टूट चुका है। प्रकाश की बहन प्रीति कुर्रे ने कहा कि उनका छोटा भाई परिवार का सहारा था।अब घर का चूल्हा कैसे जलेगा,छोटे-छोटे बच्चों को कौन संभालेगा कहते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं।

प्रकाश की पत्नी भी आंसुओं में डूबी हुई हैं। उन्होंने कहा कि पति ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। अगर उन्हें कुछ हो गया तो मेरे बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा। मैं चाहती हूं कि रेलवे इलाज की पूरी जिम्मेदारी ले और हमें 50 लाख रुपये मुआवज़ा तथा नौकरी दे ताकि परिवार किसी तरह जीवित रह सके।भाई पंकज बर्मन ने आरोप लगाया कि ठेकेदार और रेलवे ने हादसे के बाद कोई मदद नहीं की।सुरक्षा इंतज़ाम पूरी तरह नदारद थे।उन्होंने कहा हमारे भाई को हादसे के बाद अस्पताल पहुंचाने तक की जिम्मेदारी परिवार को ही निभानी पड़ी।न ठेकेदार आगे आया, न रेल प्रशासन। अगर समय रहते मदद मिलती तो शायद हालत इतनी गंभीर न होती।

मंगलवार को परिवारजन बिलासपुर डीआरएम कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। इसमें साफ लिखा गया कि प्रकाश के बेहतर इलाज की जिम्मेदारी रेलवे उठाए और जब तक वे पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाते, उनका इलाज मुफ्त कराया जाए।परिवार ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी गुहार नहीं सुनी गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि रेलवे जब हादसों से मुनाफा कमाता है तो जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ सकता। एक गरीब परिवार को यूं बेसहारा छोड़ देना अमानवीय है। फिलहाल अपोलो अस्पताल में प्रकाश का इलाज जारी है। परिजन दुआ कर रहे हैं कि वह मौत से जंग जीत जाएं, वहीं वे उम्मीद कर रहे हैं कि रेल प्रशासन और ठेकेदार इंसानियत दिखाते हुए पीड़ित परिवार की मदद आगे बढ़कर करेगा।गोपाल मौर्यमोहम्मद नासिर

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