
बिलासपुर के लिंगियाडीह में जमीन और अधिकारों की मांग को लेकर पिछले 115 दिनों से चल रहा जन आंदोलन अब एक बार फिर चर्चा में है। आंदोलन को उस समय बल मिला जब Amit Jogi धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने शासन-प्रशासन से आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की। धरना स्थल पर पहुंचे अमित जोगी आंदोलनकारियों के बीच जमीन पर बैठे और उनकी पीड़ा सुनी। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय से लोग अपनी जमीन और अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल नजर नहीं आई है।उन्होंने कहा कि क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस इलाके से गुजरते हैं, लेकिन 115 दिनों से धरने पर बैठे लोगों की सुध लेने कोई नहीं पहुंचा।

जोगी ने प्रशासन से आग्रह किया कि आंदोलनकारियों की मांगों को गंभीरता से सुना जाए और उचित समाधान निकाला जाए।जोगी ने यह भी कहा कि इलाके में जमीन को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिन्हें पारदर्शिता के साथ जांचना जरूरी है। उनका कहना था कि विकास कार्यों के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी गरीब परिवार के अधिकारों या आशियाने को नुकसान न पहुंचे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने संत कबीरदास के दोहे का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीबों की पीड़ा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं पार्षद लिंगियाडीह ने भी क्षेत्र के विधायक के साथ साथ शासन प्रशासन को खूब खरी खोटी सुनाया।उन्होंने कहा की किसी को शर्म नही आ रहा है।यहां महिलाएं 115 दिनों से धरने पर बैठे हैं अब तो धरना महा धरना का रूप ले लिया है।उन्होंने कहा कि समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है कि कमजोर वर्ग के लोगों की आवाज सुनी जाए। अंत में अमित जोगी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि छत्तीसगढ़ के लोग भले ही सरल और सीधे-सादे हों, लेकिन अगर गरीबों के आशियाने की एक भी ईंट हटाने की कोशिश की गई तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए गरीबों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।




