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विराईस फाइनेंस की पार्टनर फरहत बानो ने लगाए गंभीर आरोप, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग…

विराईस फाइनेंस की पार्टनर फरहत बानो ने लगाए गंभीर आरोप, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग विराईस फाइनेंस कंपनी की चैनल पार्टनर फरहत बानो ने बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से मुलाकात कर अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा और निराधार बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा उनकी छवि खराब करने की साजिश रची जा रही है और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। फरहत बानो ने बताया कि शिवा गुप्ता नामक युवक उनकी फाइनेंस कंपनी में नौकरी करने आया था, लेकिन कुछ समय बाद उसके खिलाफ लगातार शिकायतें मिलने लगीं। खासतौर पर महिला कर्मचारियों के प्रति उसका व्यवहार अनुचित था, जिसके कारण उसे कार्यालय आने से मना कर दिया गया। फरहत बानो का आरोप है कि शिवा गुप्ता ने उनकी कंपनी की विजिटिंग फाइल चुरा ली और अब उसका दुरुपयोग कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस बात के पूरे सबूत हैं कि शिवा गुप्ता उनके खिलाफ झूठी बातें फैला रहा है।फरहत बानो ने कहा मैं पिछले 28 वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रही हूं और कभी मेरे खिलाफ कोई शिकायत नहीं रही। लेकिन अब मुझ पर झूठे आरोप लगाकर धारा 420 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण है।उन्होंने प्रशासन से अपील की कि उनके बैंक और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की जाए, जिससे सच्चाई सामने आ सके। फरहत बानो ने कोतवाली थाना प्रभारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। उन्हें जब इस बात की जानकारी मिली, तो यह उनके लिए चौंकाने वाला था। उनका कहना है कि यदि कोई शिकायत थी, तो उन्हें पहले सूचित किया जाना चाहिए था ताकि वे अपनी सफाई पेश कर पाती।फरहत बानो के समर्थन में कई ग्राहक भी आगे आए। लक्ष्मी मानिकपुरी और सविता सहित अन्य ग्राहकों ने कहा कि वे वर्षों से फरहत बानो के संपर्क में हैं और उन्हें कभी कोई परेशानी नहीं हुई। उनके अनुसार, फरहत बानो अपने काम के प्रति ईमानदार हैं और उन पर लगाए गए आरोप झूठे प्रतीत होते हैं। फरहत बानो ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने प्रशासन और मीडिया से अपील की कि वे इस मामले की गहराई से जांच करें ताकि सच्चाई सामने आ सके और निर्दोष को झूठे आरोपों में फंसाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके।

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