
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समय शिक्षक फेडरेशन के आह्वान पर शनिवार को बिलासपुर के कोन्हेर गार्डन में हजारों की संख्या में शिक्षक एकत्र हुए। वेतन विसंगति, क्रमोन्नति, ओबीसी आरक्षण सहित विभिन्न लंबित मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना-आंदोलन किया गया। जिलाध्यक्ष सुनील पाण्डेय ने कहा कि शिक्षकों की मांगें कोई नई नहीं हैं, बल्कि यह उनका संवैधानिक अधिकार है, जिसे लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा है।धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में वेतन विसंगति दूर करने और क्रमोन्नति का लाभ देने का वादा किया था, लेकिन सरकार बने दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।

इससे प्रदेश भर के शिक्षकों में गहरा रोष है और वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी कुर्रे ने डीएससी ऐप के माध्यम से निजी मोबाइल से उपस्थिति दर्ज कराने को शिक्षकों की निजता का उल्लंघन बताया। उन्होंने मांग की कि या तो स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीन लगाई जाए या फिर शासन द्वारा आधिकारिक डिवाइस उपलब्ध कराई जाए।

वहीं टीईटी सहित अन्य नियमों को लेकर शिक्षकों पर लगाए गए अनावश्यक दबाव को समाप्त करने की भी मांग उठाई गई।प्रांतीय प्रवक्ता चंद्रप्रकाश तिवारी ने कहा कि सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर कर समतुल्य वेतनमान दिया जाए और पूर्व सेवा की गणना कर सभी लाभ प्रदान किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शासन ने मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक तथा अनिश्चितकालीन रूप लेगा। धरने में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं और संगठन पदाधिकारियों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की।




