
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रविवार को एक ऐतिहासिक आयोजन हुआ, जब अखिल भारतीय वैष्णव ब्राह्मण सेवा संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक का भव्य आयोजन हुआ। इस मंच से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समाज के गौरवशाली अतीत और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि प्रभु श्रीराम की ननिहाल कही जाने वाली छत्तीसगढ़ की भूमि पर वैष्णव ब्राह्मण समाज का अधिवेशन आयोजित होना सौभाग्य की बात है।

उन्होंने समाज की दानशीलता, परंपरा और योगदान को सराहते हुए इसे छत्तीसगढ़ के विकास में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।मुख्यमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वैष्णव ब्राह्मण समाज ने सनातन धर्म को सशक्त बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। यह समाज सिर्फ पूजापाठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शासन-प्रशासन तक अपनी पहुंच बनाई। राजनांदगांव की वैष्णव ब्राह्मण रियासत को उन्होंने आदर्श उदाहरण बताया।अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सरकार की तीर्थयात्रा योजनाओं का भी उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत हजारों श्रद्धालु लाभान्वित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि दिव्यांगों और विधवाओं के लिए आयु सीमा नहीं रखी गई है।विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी वैष्णव ब्राह्मण समाज की दूरदर्शिता की सराहना की। उन्होंने राजनांदगांव राजपरिवार के योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि किस तरह उन्होंने शिक्षा, उद्योग और रेलवे के विकास में अमूल्य योगदान दिया। महंत दिग्विजय दास और महंत घासीदास के उदाहरण प्रस्तुत किए।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने समाज को सनातन धर्म का ध्वजवाहक बताया और कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की यह बैठक समाज को और अधिक एकजुट और सक्रिय बनाएगी। उन्होंने संगठनात्मक मजबूती को भविष्य के निर्माण के लिए जरूरी बताया। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री, समाज के राष्ट्रीय पदाधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य करने वाले वैष्णव ब्राह्मण समाज के गणमान्यजन उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने समाज के प्रतिभाशाली व्यक्तियों को मंच से सम्मानित भी किया, जिससे कार्यक्रम और भी गरिमामय हो गया।




