
बिलासपुर शहर के शनिचरी बाजार में रोजाना सैकड़ों लोग ताजी मछली खरीदने पहुंचते हैं। लेकिन यहां काम करने वाले अस्थायी मछली विक्रेताओं के लिए वर्षों से कोई स्थाई व्यवस्था नहीं की गई है। मजबूरी में ये विक्रेता टीन की टपरी और दूषित वातावरण में अपना व्यापार कर रहे हैं, जिससे खरीदारों को भी असुविधा झेलनी पड़ रही है। बाजार की स्थिति इतनी बदतर है कि चारों ओर गंदगी पसरी रहती है। मछली विक्रेताओं का कहना है कि बरसात के दिनों में यहां हालात और भी बिगड़ जाते हैं।

जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण पानी भर जाता है और ग्राहकों को भी गंदे पानी से होकर खरीदारी करनी पड़ती है विक्रेताओं ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम से गुहार लगाई गई है। उन्होंने आवेदन देकर मांग की है कि मछली बाजार के पास जो खाली जगह पड़ी है, वहां उनके लिए स्थाई व्यवस्था की जाए। लेकिन अब तक निगम प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है। व्यवस्था नहीं होने के कारण विक्रेताओं को खुद ही टीन की झोपड़ी और अस्थायी दुकान लगाकर व्यापार करना पड़ रहा है।

कुछ विक्रेता ऐसे हैं जो पिछले 25 सालों से इसी तरह अपनी दुकान चला रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा अन्य व्यापारियों के लिए व्यवस्था की जा रही है। फल विक्रेताओं के लिए अलग से फ्रूट मार्केट बनाया गया है और उन्हें वहां शिफ्ट किया जा रहा है। लेकिन मछली विक्रेताओं की अनदेखी लगातार जारी है। ग्राहकों का भी मानना है कि स्वच्छ वातावरण में मछली बिक्री की व्यवस्था होनी चाहिए।

गंदगी और पानी की समस्या से खरीदारी करने वालों को परेशानी होती है। मछली विक्रेताओं ने एक बार फिर नगर निगम से अपील की है कि उनकी दशा पर ध्यान दिया जाए। जिस तरह अन्य व्यापारियों के लिए सुविधाएं दी गई हैं, उसी तरह शनिचरी बाजार में मछली व्यापारियों के लिए स्थाई मार्केट की व्यवस्था की जाए, ताकि वे सम्मानजनक ढंग से अपना व्यापार कर सकें और ग्राहकों को भी स्वच्छ वातावरण मिल सके।




