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शारीरिक अक्षमता में कमी लाकर दिव्यांगो का जीवन सरल बनाने के उद्देश्य से शिविर का आयोजन।

शारीरिक अक्षमता मे कमी लाकर दिव्यांगो का जीवन सरल बनाने के उद्देश्य से शिविर का आयोजन किया गया. बिलासपुर सिंधी समाज की पहल में राजस्थान के नारायण सेवा संस्थान का विशेष सहयोग रहा. कृत्रिम अंग के लिए सौ से ज्यादा ने जांच कराया. सिंधी सेंट्रल पंचायत सेंट्रल युवा विंग सिंधु चेतना और झूलेलाल सेवा समिति ने संयुक्त रूप से शिविर आयोजित किया. जिसमें राजस्थान उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान का विशेष सहयोग रहा. यहां दुर्घटना या जन्मजात शारीरिक अक्षमता का शिकार लोगों की जांच की गई. डॉ रामनाथ ठाकुर ने बताया कि दिमागी लकवा अक्सर जन्म से पहले दिमाग के असामान्य विकास की वजह से होता है. लंबे समय तक चलने वाले उपचार में फिजियो थेरेपी, दवाओं और कुछ मामलों में हड्डी और मांसपेशियों मे आयी गड़बड़ी का ऑपरेशन से इलाज सम्भव है. सेरिब्रल पालसी के मरीजों की बढ़ती संख्या जागरुकता मे कमी और परिजनों की लापरवाही का नतीजा है।

दिव्यांग को अधिकतम क्षमता हासिल करने में सहायक उपकरण लगाने दूसरे चरण का शिविर लगाया जाएगा. दो दिनों मे सौ से अधिक दिव्यांग जिसमें सभी उम्र के मरीज़ शामिल थे जांच करायी है. घर पर फिजियोथेरेपी करने तरीका बताकर चिकित्सक ने इसकी शुरुआत करने सलाह दी. सेंट्रल युवा विंग के अध्यक्ष अजय भीमनानी ने कहा मदद करने की मंशा से उनका य़ह पहला प्रयास है. कृत्रिम अंग लगाने जांच मे अलग अलग मरीज़ मिले है. आगे डाक्टरों की संख्या बढ़ाकर आवासीय शिविर लगाने योजना पर काम किया जाएगा. जिससे मरीज़ और उनके परिजनों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिल सके. आयोजन के दौरान मरीज़ और परिजनों के लिए शिविर स्थल पर भोजन पानी की व्यवस्था की गई. सिंधी समाज के वरिष्ठ सदस्य समेत युवा टीम के सदस्यों की भागीदारी रहीं।

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