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शिक्षकों के स्थानांतरण और पदोन्नति में अब पारदर्शिता अनिवार्य युक्तियुक्तकरण से दूर होगी स्कूलों में शिक्षकों की असमानता

प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और असमान वितरण को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने युक्तियुक्तकरण को छात्रों के हित में उठाया गया आवश्यक निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए बेहद जरूरी हो गया था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में कई स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि कुछ स्कूलों में छात्रों से ज्यादा शिक्षक पदस्थ हैं। इस असंतुलन को दूर करने के लिए शिक्षकों का समुचित वितरण जरूरी है। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से हर स्कूल को जरूरत के मुताबिक शिक्षक मिल सकेंगे, जिससे शिक्षा व्यवस्था में संतुलन आएगा।इस प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए अब काउंसलिंग में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी अनिवार्य की गई है। अब कोई भी फैसला बंद कमरे में नहीं लिया जा सकेगा।

साथ ही सभी खाली पदों की जानकारी काउंसलिंग स्थल पर सार्वजनिक डिस्प्ले बोर्ड पर लगाई जाएगी, जिससे किसी को भी जानकारी छुपाई न जा सके।सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि शिक्षकों की पदोन्नति और स्थानांतरण में किसी भी स्तर पर मनमानी न हो। जिला शिक्षा अधिकारी और ज्वाइंट डायरेक्टर स्तर पर अब कोई भी निर्णय पारदर्शिता और नियमों के तहत ही लिया जाएगा।पिछली सरकार के दौरान स्थानांतरण और प्रमोशन प्रक्रिया में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। आरोप यह भी थे कि जेडी कार्यालयों में पद दिलाने के लिए दलालों द्वारा करोड़ों रुपये की वसूली की जाती थी। अब सरकार ने इस पूरी व्यवस्था पर सख्त निगरानी और नियंत्रण की पहल की है। मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया है कि योग्य और ईमानदार शिक्षकों को अब उनका हक मिलेगा। पारदर्शिता और जवाबदेही के नए मानकों के साथ सरकार शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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