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Monday, April 6, 2026
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*‘‘शिक्षा का दान या देंन दोनों ही मानव जीवन में सर्वोपरि*- विक्रम सियाल

‘‘शिक्षा का दान या देंन दोनों ही मानव जीवन में सर्वोपरि– विक्रम सियाल

सी. एम. दुबे स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सर्वोत्तम संचार विषय पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रुप में श्री विक्रम सियाल उपस्थित थे एवं भौतिक विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. आर. के. सक्सेना विशिष्ठ अतिथि एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता शासी निकाय अध्यक्ष डॉ. संजय दुबे जी ने की।

व्याख्यान कार्यक्रम में सर्वप्रथम मां सरस्वती के सम्मुख पुष्प गुच्छ अर्पित कर कार्यक्रम का शुभांरभ किया गया एवं अतिथियों का पुष्प गुच्छ से स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री विक्रम सियाल जी ने अपने उद्बोधन में कहां की जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिए हमें ईमानदार होना चाहिए एवं लक्ष्य के प्रति लगन से मेहनत किया जाना चाहिए तथा हमें छोटी – छोटी बातो पर ध्यान दिया जाना चाहिए जो हमारे लक्ष्य को पूर्णतः प्रभावित करती है। शिक्षा का दान या दिन मानव जीवन में सर्वोपरि है अध्यापन कार्य में संप्रेषण का महत्व बहुत ही अटॉर्नी होता है इस संदर्भ में अपने जीवन की अनुभवों को साझा करते हुए उन्होनें उद्यमिता का उदाहरण देते हुए समझाया कि एक व्यापारी जो एक व्यक्ति को गांव में जूता बेचने को कहां किन्तु वह व्यक्ति बिना जूता बेचे ही आ गया और कहां कि वहां के लोग केवल चप्पल पहनते है जूता नही पहनते है अर्थात उसके मेहनत का कोई परिणाम नही निकला, यही कार्य दूसरे व्यक्ति को दिया गया तो उसने अपने मालिक से कहां कि वहां पर एक ट्रक जूताओं की आवश्यकता है क्योंकि यहां के लोग जूता नही पहनते है अर्थात कार्य एक ही है पर दो व्यक्तियों की दो दृष्टिकोण है।

इस कार्यक्रम में शासी निकाय अध्यक्ष डॉ. संजय दुबे जी ने कहां कि हमें सदा अपने लक्ष्यों के प्रति सजग रहना चाहिए और संपूर्ण मन से कार्य को पूर्ण किया जाना चाहिए, हमें कल की प्रतिक्षा नही करना चाहिए। समय रहते अपने व्यक्तित्व में निखार लाना चाहिए। उन्होनें यह भी कहां कि श्री विक्रम सियाल अविभाजित छत्तीसगढ़ में सीमेंट की कंपनीयों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य संपादित कर चुके है अब वे नैनीताल में स्वयं का होटल व्यवसाय कर रहे है वे प्रेरणात्मक प्रभवशाली वक्ता के साथ – साथ एक उद्योगपति भी है।
आई.क्यू.ए.सी. के समन्वयक डॉ. डी. के. चक्रवर्ती जी ने कहां कि हमें अपने व्यवहार के साथ – साथ व्यक्तित्व पर भी ध्यान दे कर कार्य को संपादित किया जाना चाहिए।

इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष शासी निकाय डॉ. संजय दुबे जी एवं प्राचार्य डॉ. संजय सिंह के द्वारा श्री विक्रम सियाल एवं भौतिक विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. आर. के. सक्सेना जी का शॉल, श्रीफल एवं मोमेन्टो देकर सम्मापित किया गया।

उक्त व्याख्यान कार्यक्रम आई.क्यू.ए.सी. के माध्यम से संपादित किया गया।

कार्यक्रम के पश्चात् अतिथि महोदय के द्वारा महाविद्यालय का भ्रमण किया गया एवं विभागों की प्रबंध व्यवस्था की भूरी – भूरी प्रशंसा की।

व्याख्यान कार्यक्रम का संचालन डॉ. कमलेश जैन एवं श्रीमती सुमेला चटर्जी के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ने किया।

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या छात्र-छात्राएं एवं प्राध्यापकों की उपस्थित रहे, उन्होनें इस व्याख्यान कार्यक्रम का लाभ उठाया।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. श्रीमती अंजली चतुर्वेदी, डॉ. राजकुमार पंडा एवं डॉ. श्रीमती एस. पावनी का विशेष योगदान रहा।

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