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शिक्षा के अधिकार के तहत भर्ती छात्र अन्य खर्च वहन न कर पाने के कारण लगातार छोड़ रहे स्कूल।

शिक्षा के अधिकार के तहत 2012 से अब तक करीब 3 लाख 10 हजार छात्रों को प्रदेश की 6 हजार स्कूलों में दाखिला तो मिला, लेकिन इनमें से 17 हजार से ज्यादा बच्चों को पढ़ाई छोड़नी पड़ गई है। इसके कई कारण रहे हैं। आरटीई के तहत इन बच्चों के लिए फीस तो सरकार दे रही है, लेकिन यूनिफॉर्म और कॉपी-किताबों पर छोटी कक्षाओं में ही 10-15 हजार का सालाना खर्च आ रहा है। इसे वहन करने में गरीब अभिभावक परेशान हो रहे हैं। इसके साथ ही बड़े निजी स्कूलों में दूसरे खर्चे भी काफी महंगे है जो कि बच्चों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। अब हाईकोर्ट ने सरकार से और निजी स्कूलों से पूरी रिपोर्ट मांगी है।

जानकारी के मुताबिक आरटीई में दाखिल बच्चों की फीस आदि का खर्च तो सरकार उठाती है, लेकिन निजी स्कूल यूनिफॉर्म और कॉपी-किताबों के नाम पर इतनी रकम की डिमांड कर रहे हैं कि वहां बच्चों का पढ़ पाना संभव नहीं हो पा रहा है और वे पढ़ाई छोड़ रहे हैं। खास बात यह भी है कि आरटीई में दाखिल बच्चे अगर स्कूल छोड़ें तो प्रबंधन को उसके पैरेंट्स से बात कर रिपोर्ट डीईओ को भेजनी होती है लेकिन हजारों बच्चों के पढ़ाई छोड़ने के बावजूद जिला शिक्षा अधिकारियों के पास स्कूलों की ओर से गिनती की रिपोर्ट ही पहुंची हैं।

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