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सरकंडा थाने में पदस्थ रहे प्रधान आरक्षक लखन मेश्राम की मौत का मामला गरमाया, कांग्रेस के पूर्व नगर विधायक शैलेश पांडेय के बाद सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ संगठन ने भी मृतक को न्याय दिलाने की मांग की।

सरकंडा थाने में पदस्थ रहे प्रधान आरक्षक लखन मेश्राम की मौत का मामला गरमाता जा रहा है। कांग्रेस के पूर्व नगर विधायक शैलेश पांडेय के बाद सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ संगठन ने भी मृतक को न्याय दिलाने की मांग की है। वही इस पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक ने जांच टीम गठित कर दोषियों कार्यवाही की बात की है। सरकंडा थाने के हेड कांस्टेबल लखन मेश्राम के कथित सुसाइड केस में उनके बेटे कृष्णकांत मेश्राम ने सरकंडा पुलिस पर कई गम्भीर आरोप लगाए है। उन्होंने अपने पिता की खुद्कुशी के पीछे का कारण थाने में टेंशन भरे कामकाज और अफसर शाही को बताया था।कृष्णकांत के अनुसार घटना के दिन वे बार-बार थाने आना-जाना कर रहे थे।

वहीं से अधिक फोन आ रहा था। उसी रात 12 बजे घर आए फिर अचानक लापता हो गए। परिजन पूरी रात ढूंढते रहे पर मृतक लखन का पता नहीं चला। दूसरे दिन सुबह घर के पीछे नीम के पेड़ पर उनकी लाश लटकती मिली। इस घटना से नाराज सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते सहित पदाधिकारियों ने थाना ट्रेनी इंचार्ज पर आरोप लगाते हुए मामले की जल्द से जल्द जांच करने अन्यथा उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी है। वहीं इस पूरे मामले में बिलासपुर पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने बताया कि प्रधान आरक्षक के आत्महत्या के कारणों की बारीकी से जांच की जा रही है, इसके लिए एडिशनल एसपी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है जो हर पहलू पर जांच कर रहे है।

बताया जाता है कि प्रधान आरक्षक लखन मेश्राम सरकंडा थाने में मालखाना की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इंटरनेट मीडिया पर आरोप लगाया जा रहा है कि थाने में पदस्थ अधिकारी उन पर मालखाने में जब्त सामान को न्यायालय में पेश करने का दबाव बना रहे थे। गुरुवार की शाम इसी बात को लेकर अधिकारी ने उन्हें फटकार लगाई थी। इस पर उन्होंने कम समय में मालखाने से सामान निकालकर न्यायालय में पेश कर पाने में असमर्थता जताई थी।

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