
जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति और जिला स्तरीय पुनरीक्षा समिति की अहम बैठक में इस वर्ष जिले के लिए ₹13,532 करोड़ की वार्षिक ऋण योजना को मंजूरी दी गई। यह योजना पिछले वर्ष की तुलना में ₹1,000 करोड़ अधिक है। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर संजय अग्रवाल ने की, जिन्होंने डेयरी और मत्स्यपालन जैसे कृषि आधारित क्षेत्रों में लोन वितरण की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए बैंकों को लंबित प्रकरणों की तत्काल समीक्षा कर ऋण स्वीकृत करने के निर्देश दिए।कलेक्टर ने बैठक में खुलासा किया कि कुछ बैंकों ने सरकारी सब्सिडी लेने के बावजूद गरीब हितग्राहियों को ऋण नहीं दिया। अंत्यावसायी योजना के तहत कोटा विकासखंड की सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और SBI लखराम शाखा को सब्सिडी एडवांस में दी गई थी।

लेकिन बीते दो वर्षों से ये बैंक ₹8 लाख की राशि दबाकर बैठे हैं, और न तो लोन दिया गया न ही सब्सिडी राशि लौटाई गई। इस पर कलेक्टर ने कड़ा ऐतराज जताते हुए संबंधित बैंकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं में गरीब हितग्राहियों की भागीदारी सुनिश्चित करना बैंकों की जिम्मेदारी है।कलेक्टर श्री अग्रवाल ने बैंकों को चेताया कि वे गरीबों की ऋण आवश्यकताओं को प्राथमिकता से लें, और पात्र हितग्राहियों को लोन देने में सहानुभूति रखें। उन्होंने PM मुद्रा योजना, स्वनिधि योजना और बीमा योजनाओं को प्रभावशाली तरीके से लागू करने, जन-जागरूकता फैलाने और वित्तीय साक्षरता अभियान चलाने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, आरबीआई के दीपक तिवारी, नाबार्ड के अशोक साहू, लीड बैंक मैनेजर दिनेश उरांव सहित सभी बैंक प्रतिनिधि उपस्थित थे।




