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सरकार शिक्षा का स्तर सुधारने स्कूलों के अधो संरचना और शिक्षकों के वेतन पर किए करोड़ो रूपये खर्च, रिजल्ट फिर भी निराशाजनक।

सरकार शिक्षा का स्तर सुधारने स्कूलों के अधो संरचना और शिक्षकों के वेतन पर करोड़ो रूपये खर्च करती हैं, उसके बावजूद भी राशि के अनुकूल स्तर में कोई सुधार नजर नहीं दिख रहा। हाल ही में दसवीं और बारहवीं का रिजल्ट जारी हुआ है, जिसमें आत्मानंद स्कूलों की स्थिति तो और दयनीय है। बड़ी संख्या में फेल हुए बच्चे शिक्षा विभाग का आईना हैं, सरकार बदलने से अब शिक्षा विभाग पर शिकंजा कसने की बात कही जा रही हैं।

पूर्व कांग्रेस की सरकार ने निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों को आत्मानंद का दर्जा देकर प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों से अधिक वेतन और अधो संरचना स्थापित किया था, उसके बावजूद रिजल्ट सिफर ही दिखाई दे रहा है। हम बात कर रहे हैं शहर के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित स्वामी आत्मानंद मल्टीपरपज स्कूल की, दयालबंद में स्थित इस स्कूल में एक समय में यहाँ से निकले छात्र अधिकारी, मंत्री, नेता जैसे पदों पर बैठे है। आत्मानंद बनने के बाद केवल नाम ही बदला है और स्तर नीचे चला गया है, इस वर्ष 10वीं हिंदी मीडियम में यहां 101 बच्चों ने परीक्षा दी थी, जिसमें से आठ बच्चे सप्लीमेंट्री आए हैं और मात्र 49 बच्चे ही पास हुए हैं जबकि 44 बच्चे फेल हो गए हैं, बजट का बड़ा हिस्सा खर्च करने के बावजूद भी इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का असफल होना कहीं ना कहीं शिक्षा विभाग और टीचरों की लापरवाही, नाकामी दर्शाती है। इस विषय पर स्कूल की प्राचार्या चंदनापाल का कहना है कि यह फेलियर बच्चे थे इसलिए भी फेल हो गए।

मेडम का तर्क सुनकर सरकारी टीचर की सोंच पर तरस आता हैं, प्रश्न उठता हैं कि जब उन्हें पता था यह फेलियर बच्चे हैं उस पर अधिक ध्यान दिया जाना था, पर मोटी तनख्वाह लेकर ढर्रे पर काम करने के आदी इन सरकारी टीचरो को विद्यार्थियों के रिजल्ट और शिक्षा के स्तर से क्या लेना देना, बच्चे फेल हो या पास तय वेतन तो मिलना ही हैं, जबकि प्राइवेट स्कूलों में फोरफॉर्मेन्स के आधार पर काम मे रखा जाता हैं, जनता के टैक्स से इन शिक्षकों को तनख्वाह दिया जाता हैं, ताकि जो महंगे स्कूलों में नही पढ़ सकते, वे सरकारी स्कूलों में भविष्य सवार सकते है, लेकिन सरकारी मानसिकता ने तो इन बच्चों का भविष्य ही दाव पर लगा दिया हैं। अभिभावकों को अब उम्मीद है कि ऐसे बेलगाम शिक्षा विभाग पर भाजपा की सरकार ही नकेल कस सकती है।

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