
बिलासपुर सावन माह के पावन अवसर पर सरकंडा स्थित श्री पीतांबरा पीठ त्रिदेव मंदिर में सावन महोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। मंदिर परिसर में श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का महारुद्राभिषेकात्मक महायज्ञ आयोजित किया गया है, जिसमें विद्वानों द्वारा पारंपरिक ‘नमक चमक’ विधि से प्रतिदिन अभिषेक और मंत्रोच्चार किया जा रहा है। पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश महाराज ने बताया कि सावन माह में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी समस्याओं का समाधान होता है।

उन्होंने कहा कि “एक लोटा जल, सारे दुखों का हल” यही शिव भक्ति का मूल मंत्र है। शिवपुराण के अनुसार सावन के महीने में जलाभिषेक का विशेष महत्व है, लेकिन सही विधि और नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। आचार्य डॉ. दिनेश जी ने शिवलिंग पर जल चढ़ाने की विधि समझाते हुए कहा कि जल अर्पण करते समय भक्त को शांत मन से बैठकर उत्तर दिशा की ओर मुख कर पूजा करनी चाहिए। तांबे, कांसे या चांदी के पात्र से ही जल चढ़ाना शुभ होता है जबकि स्टील के बर्तन का प्रयोग वर्जित है।

जल चढ़ाने के क्रम में गणेश, कार्तिकेय, अशोक सुंदरी, माता पार्वती और अंत में शिवलिंग पर जल अर्पित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि जल अर्पित करते समय “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ त्र्यंबकं यजामहे…” मंत्रों का जाप अवश्य करें। साथ ही सावन में शुद्धता, संयम और परंपरागत वस्त्र धारण करने का विशेष महत्व है। यदि विधिपूर्वक शिव पूजन किया जाए तो सावन माह में शिव की कृपा से भक्तों को समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है।




