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Friday, April 3, 2026
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*सूर्यवंशी समुदाय के शिक्षक को झूठे मामले में फसाने, निलंबित करने के खिलाफ GSS द्वारा संविधान समर्थकों के साथ साझा मोर्चा से आंदोलन संगठित करने का फैसला लिया।*

सूर्यवंशी समुदाय के शिक्षक को झूठे मामले में फसाने, निलंबित करने के खिलाफ GSS द्वारा संविधान समर्थकों के साथ साझा मोर्चा से आंदोलन संगठित करने का फैसला लिया।

पिछले दोनों ग्राम मोहराई के शिक्षक श्री रतनलाल सरोवर द्वारा अपनी एवं अपने साथियों के बीच नव बौद्धों के लिए बाबा साहेब डॉ. आम्बेडकर द्वारा स्थापित 22 प्रतिज्ञाओं का 22 जनवरी 24 को सार्वजनिक शपथ वचन का कार्यक्रम किया गया।
इस पर, हिंदू राष्ट्र के सिपहसालारों द्वारा स्कूल में बच्चों को राम, कृष्ण विरोधी शपथ दिलाने का झूठा समाचार फैलाया गया और राजनैतिक दबाव से पुलिस ने गिरफ्तार किया और शिक्षा विभाग ने निलंबित कर दिया।
जबकि वास्तविकता यह है कि, यह कार्यक्रम स्कूल में, सरकारी ड्यूटी के तहत नहीं कर अवकाश अवधि में, अपने गली-मोहल्ले में किया गया।
कथित रूप से राम,कृष्ण को अपमानित करने की बात भी गलत है। आम्बेडकर साहब का 22 प्रतिज्ञा में जो तथ्य है, वहां सिर्फ इतना है कि, मैं (नव बौद्धों के लिए) किस देवी-देवता को मानूंगा और क्या-क्या नहीं मानूंगा और किस आचरण से चलूंगा, इतना ही है। (यह सार्वजनिक दस्तावेज है, इसे कोई भी पढ़ जान सकता है)।
भारतीय संवैधानिक धार्मिक आजादी के तहत कोई भी नागरिक, किसी भी देवी- देवता को माने या न माने उसकी आजादी है। किसी को भी किसी के मानने या न मानने का आदेश नहीं दे सकता और यह 22 प्रतिज्ञा का शपथ ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में मौजूद है। इसका पठन-पाठन करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। यदि यह अपराध है तो, सरकार को पहले इसे प्रतिबंधित करें तभी माना जाएगा।
क्या? रामचरित मानस में लिखा और झूम-झूमकर गाया जाने वाला “जे वर्णाधम तेली, कुम्हारा,स्वपच किरात कोल कलवारा” अपराध माना गया है या नही? इसमें विभिन्न बहुसंख्यक जातियो को अपमानित-प्रताड़ित किया गया है। इसे गाये जाने वालो पर भी क्या अपराध दर्ज होगा?
शिक्षक की गिरफ्तारी और निलंबन की कार्यवाही पूरी तरह से मनुवादी फासिस्टों का दमनात्मक कार्यवाही है। और धर्मनिरपेक्ष देश को एक धार्मिक राष्ट्र बनाकर आम लोगों की स्वतंत्रता को कुचलने का क्रूर प्रयास है।
GSS प्रमुख श्री लखन सुबोध ने आज दिनांक 30-01-24 को उत्पीड़ित शिक्षक के घर जाकर भेंट-चर्चा किया। और न्याय के लिए उन्हें संग-साथ देने का वचन दिया। GSS इसके लिए सभी संविधान समर्थक, सामाजिक, राजनीतिक संस्थाओं से सझा संघर्ष करने का आवाहन करता है।

             *वीरेंद्र भारद्वाज* 
                (GSS प्रवक्ता)

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