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सोनगंगा कॉलोनी में रसूखदार भवन स्वामी का जोर, निगम अधिकारियों के निरीक्षण के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं।

सोनगंगा कॉलोनी में नींव से नोटिस देते देते 3 मंजिला भवन बन गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब स्थानीय लोग इसे लेकर परेशान है मगर रसूखदार भवन स्वामी के आगे किसी का जोर नहीं चल रहा। नगर निगम हो और कोई चमत्कार न हो ऐसा नहीं हो सकता। कुछ तो जादू है कि नोटिस देने के बावजूद 3 मंजिला भवन बन गया और नोटिस नोटिस खेलने, निगम के अधिकारियों के कई बार निरीक्षण करने के बाद आज भी अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है।

बात है सोनगंगा कॉलोनी में निर्माणरत अनमोल शर्मा के भवन की, जिसमें दिसंबर 2023 में निगम द्वारा भवन अनुज्ञा, भूस्वामी के दस्तावेज आदि प्रपत्रों के साथ निगम कार्यालय में उपस्थित होने अनमोल शर्मा को कहा गया था। उक्त नोटिस का पालन नहीं करने के कारण पुनः द्वितीय नोटिस जोन क्रमांक 7 के कमिश्नर द्वारा अगस्त माह में दिया गया। अब चमत्कार यह है की इस बीच कई बार निगम कर्मचारियों एवं अधिकारियों का आना जाना इस निर्माणाधीन भवन में हुआ तथा उन्होंने इसे बनते बढ़ते हुए भी देखा होगा। फिर भी पता नहीं क्यों इस अवैध निर्माण को इतना बढ़ने दिया और अब अपने बचाव में नोटिस नोटिस का खेल खेल रहे हैं। बड़ी बात है तीन मंजिला भवन का ड्रेनेज सिस्टम नजर नहीं आता पाइप लाइन को सड़क पर ही छोड़ा जा रहा है, जिससे भवन का सारा पानी सड़कों पर फैला नजर आ रहा है जिसे लेकर मोहल्ले वासियों में भी आक्रोश है।

ऐसे प्रकरणों से साफ साफ समझ में आता है कि समय रहते इस तरह के निर्माण को होने दिया जाता है तथा बाद में इसे नियमितीकरण के माध्यम से वैध कर दिया जाता है। शासन को चाहिए कि इस प्रकार के अवैध निर्माण के जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों पर कठोर कार्यवाही करे और इस भवन के अवैध निर्माण को कानूनी प्रक्रिया से हटाए। इसके पूर्व कॉलोनीवासियों ने इस निर्माण पर निर्माणकर्ता के समक्ष कई बार आपत्ति दर्ज की जिसे उसने अनसुना कर दिया। कोई व्यक्ति बिना रसूख के बिना नक्शे, अनुज्ञा आदि के इतना बड़ा अवैध निर्माण नहीं कर सकता।

इससे उसके निगम एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से मधुर संबंध होने का संदेह होना लाजिमी है। जब इस संबंध में जोन 7 के कमिश्नर प्रवीण शर्मा से मामले की जानकारी चाहिए गई तो उन्होंने कहा कि कल ही मेरा ट्रांसफर यहां हुआ है इस विषय पर मैं कुछ भी नहीं जानता और मीडिया से बात करने से मना कर दिया। इस सारे मामले को देखकर लगता है कि कहीं ना कहीं निगम इस अवैध निर्माण को बचा रहा है। अगर इसकी जांच की गई तो बड़ी गड़बड़ी सामने आएगी।

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