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स्कूल बंद, दिव्यांग बच्चों की शिक्षा संकट में बिल्डिंग के अभाव में स्कूल बंद

शहर के विशेष बच्चों के लिए एकमात्र सहारा बने जस्टिस तन्खा मेमोरियल रोटरी फॉर स्पेशल चिल्ड्रन स्कूल के अचानक बंद हो जाने से दिव्यांग बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। यह स्कूल वर्षों से मंदबुद्धि और मूकबधिर बच्चों को विशेष शिक्षा व देखभाल प्रदान कर रहा था। लेकिन अब जब स्कूल प्रबंधन ने आगामी सत्र से इसे बंद करने का निर्णय लिया है, तो बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति दोनों पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। स्कूल प्रशासन का कहना है कि उचित बिल्डिंग और संसाधनों के अभाव में अब शाला को जारी रखना संभव नहीं है। लेकिन इसके पीछे सबसे बड़ी कीमत उन मासूम बच्चों को चुकानी पड़ रही है, जिन्हें सामान्य स्कूलों में समायोजित करना मुश्किल है। विशेष शिक्षक, विशेष पद्धति और एक संवेदनशील वातावरण ये सब कुछ वर्षों में बनता है, जिसे एक झटके में छीन लिया गया है। इन बच्चों ने इसी शाला को ही अपना दूसरा घर बना लिया था। शिक्षकों के साथ उनका भावनात्मक रिश्ता ऐसा था कि वे खुलकर सीखना और अभिव्यक्त करना सीख पाए थे। परेशान अभिभावकों का कहना है कि नजदीकी इलाकों में ऐसा कोई और संस्थान नहीं है जहाँ वे इन बच्चों की शिक्षा को जारी रख सकें। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों का भविष्य अधूरा और अंधकारमय लगने लगा है। इस मुद्दे को लेकर अभिभावकों ने कलेक्टर से मुलाकात की है और स्कूल को बंद न करने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि यदि भवन का अभाव है तो प्रशासन कोई वैकल्पिक व्यवस्था करे या स्थायी भवन उपलब्ध करवाए, ताकि इन विशेष बच्चों की शिक्षा बाधित न हो दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा केवल अधिकार नहीं, बल्कि उनकी आत्मनिर्भरता की पहली सीढ़ी है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या व्यवस्था इन बच्चों की जरूरतों को सुन पाएगी? या फिर संवेदनाओं के अभाव में एक और आशा का केंद्र यूं ही खत्म हो जाएगा।

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