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हाईकोर्ट की फटकार के बाद हरकत में आई पुलिस, रसूखदारों को बचाने के आरोप कार जब्त हुई, आरोपी फिर भी ओझल… क्या कानून सबके लिए एक जैसा नहीं?

हाईवे जाम कर रईसजादों के फोटोशूट मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट की नाराजगी के बाद पुलिस ने दिखावटी कार्रवाई तो शुरू कर दी, लेकिन आरोपियों को बचाने की कोशिशें साफ नजर आ रही हैं।बिलासपुर रायपुर नेशनल हाईवे-130 पर लग्जरी कारों की लाइन लगाकर वीडियो शूट करने वाले वेदांश शर्मा और उसके साथियों के खिलाफ अब सकरी थाना में FIR दर्ज हुई है। IPC की धाराओं एवम BNS की धाराओं के तहत केस पंजीबद्ध हुआ है।पुलिस ने सातों वाहन जब्त कर लिए हैं, लेकिन अब तक किसी आरोपी को सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किया गया है।हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सवाल उठाया था कि सार्वजनिक रास्ता बाधित करने जैसी गंभीर हरकत पर महज 2000 के चालान क्यों।कोर्ट ने मामूली कार्रवाई और आरोपियों की पहचान छुपाने पर सख्त नाराजगी जताई थी। इसी के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, लेकिन दिखावे से आगे कुछ नहीं।मामले में मुख्य आरोपी वेदांश शर्मा, भाजपा नेता के करीबी और पूर्व कांग्रेस नेता विनय शर्मा का बेटा है। हाईवे जाम से यातायात बाधित हुआ, आम लोगों को परेशानी हुई, लेकिन कोई बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। आरोप है कि रसूख के आगे पुलिस कमजोर पड़ गई।सवाल उठ रहे हैं कि क्या कानून सिर्फ आम आदमी पर ही सख्ती दिखाता है।जब गुनहगारों के चेहरे तक नहीं दिखाए जाते और सिर्फ गाड़ियों को सामने लाया जाता है, तो न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े होना लाज़मी है। हाईकोर्ट की नजर अब इस पूरे मामले पर बनी हुई है।

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