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15 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा के साथ महाप्रभु भगवान जगन्नाथ वापस आयेंगे अपने मंदिर, अभी मौसी मां के मंदिर गुंडिचा में 56 भोग का उठा रहे आनंद।

महाप्रभु भगवान जगन्नाथ अभी मौसी मां के मंदिर गुंडिचा में 56 भोग का आनंद उठा रहे हैं। भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भी साथ है। गुरुवार को हेरा पंचमी पर लक्ष्मी जी की नाराजगी के बाद अब महाप्रभु वापस अपने मंदिर लौटने की तैयारी में हैं। दिनभर भक्तों के मिलने का सिलसिला चल रहा है। साथ ही शाम को होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद ले रहे हैं। 15 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा निकाली जाएगी। भगवान मौसी मां के घर से वापस श्रीमंदिर जाएंगे। बहुड़ा यात्रा के छेरापहरा की रस्म आरआर स्वाइन करेंगे। दोपहर दो बजे से रथयात्रा निकाली जाएगी। जिस रास्ते से भगवान मौसी मां के घर गए थे, उसी रास्ते से वापस आएंगे।

बहुड़ा यात्रा गुंडिचा मंदिर से निकलकर बंगाली स्कूल चौक, तोरवा थाना काली मंदिर रोड, दयालबंद, गांधी चौक, टैगोर चौक, तितली चौक, रेलवे कालोनी गिरजा चौक, सोलापुरी चौक, स्टेशन चौक, तितली चौक से होते हुए श्री श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचेगी। मान्यता के अनुसार, देव पूर्णिमा के अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को पुरोहितों द्वारा 108 कलश जल और 64 प्रकार की जड़ी-बूटियों से महास्नान कराया गया था। इसके बाद, महाप्रभु बीमार हो गए और अणासार कक्ष में विश्राम के लिए चले गए। 14 दिन बाद भगवान स्वस्थ्य हुए। नवजोबन रूवरूप के दर्शन हुए। जिसके बाद महाप्रभु रथयात्रा कर मौसी मां के मंदिर चले गए। अभी वहीं हैं और महाप्रभु 15 जुलाई की दोपहर वापस अपने मंदिर पहुंचेंगे।

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