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Wednesday, April 1, 2026
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1910 रुपये मानदेय में जिम्मेदारियों का बोझ, एनआरएलएम की सक्रिय महिलाएं अब सड़कों पर उतरने को मजबूर

बिलासपुर।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कार्यरत सीआरपी सक्रिय महिला संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया है। स्कीम वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया से संबद्ध संघ ने कलेक्टर सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर महिलाओं की समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की है। बताया गया है कि एनआरएलएम के अंतर्गत सीआरपी/सक्रिय महिलाएं पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू कराने में अहम भूमिका निभा रही हैं। वे समूह गठन बैठकों का आयोजन, बचत-ऋण गतिविधियां, सर्वेक्षण, बीमा, कृषि, पशुपालन सहित कई सरकारी कार्य करती हैं, इसके बावजूद उन्हें मात्र 1910 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो अत्यंत कम है और जीवन यापन के लिए अपर्याप्त है। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि ऑनलाइन कार्यों के लिए निजी मोबाइल और इंटरनेट का खर्च महिलाओं को स्वयं उठाना पड़ता है। कई जगहों पर वर्षों से कार्यरत सक्रिय महिलाओं को हटाया जा रहा है जबकि कुछ जिलों में उनका भुगतान भी समय पर नहीं हो रहा। इसके अलावा लोकसभा वीपीआरपी व लक्षपति दीदी जैसी योजनाओं का अतिरिक्त कार्य भी बिना उचित पारिश्रमिक के कराया जा रहा है। महिला संघ की प्रमुख मांगों में मानदेय बढ़ाकर सम्मानजनक स्तर पर करने, न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत भुगतान, नियमितीकरण, समय पर सीधे बैंक खाते में राशि जमा करने, मोबाइल व इंटरनेट खर्च देने और जबरन कार्य से हटाने पर रोक लगाने की मांग शामिल है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

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