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23 अप्रैल मंगलवार को बिलासपुर शहर के मुख्य मार्ग से लेकर मोहल्लों में स्थित हनुमान जी के मंदिरों में बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ हनुमान जयंती मनाई गई।

मंगलवार को श्रीराम भक्त हनुमान की जयंती पर पूरा शहर भगवामय हो गया। जगह-जगह केसरिया ध्वज, पताका और बैनर पोस्टर लगाकर पंडाल सजाए गए और पूरा शहर भक्ति में डूब गया। शहर के विभिन्न मंदिरों में हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से लेकर देर रात तक हर गली-मोहल्लों में भंडारे का आयोजन चलता रहा।

23 अप्रैल मंगलवार को बिलासपुर शहर के मुख्य मार्ग से लेकर मोहल्लों में स्थित हनुमान जी के मंदिरों में बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ हनुमान जयंती मनाई गई। इस अवसर पर लोग पहले से मंदिरों के आसपास साफ सफाई मंदिरों की रंगाई पोताई और लंगर लगाने से लेकर भण्डारे के लिए टेंट लगाकर तैयार थे। जैसे ही हनुमान जी का जन्मोत्सव का दिन आया सुबह से ही बिलासपुर के लगभग सभी हनुमान मंदिरों में श्रद्वालुओं का तांता लगा है। मंदिर परिसर में सुंदर कांड और हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया गया है। इसके अलावा शहर सहित अंचल भर में भव्य रूप से भंडारे का भी आयोजन किया गया। हनुमान जन्मोत्सव के खास अवसर पर जी न्यूज के टीम ने भी शहर सहित आसपास क्षेत्रों का भ्रमण किया। देखा गया कि सिरगिट्टी महिमा नगर में संतोष सिंह और उनके परिवार की ओर से हनुमान जन्मोत्सव पर सुबह से शाम तक विशाल भंडार का आयोजन किया गया। जहां क्षेत्रवासियों सहित आसपास के लोगों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

इसी तरह जूनी लाइन, कश्यप कालोनी में भी हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विशेष रूप से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यहां भी क्षेत्रवासियों सहित शहरवासियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इसी के साथ पुराना बस स्टैंड, तेलीपारा, सरकंडा, डीआरएम ऑफिस के बाहर पंचमुखी हनुमान मंदिर, जीआरपी थाने के द्वारा और बुधवारी बाजार हनुमान मंदिर सहित शहर भर में हनुमान जी के जन्मोत्सव पर सुबह से शाम तक विविध आयोजन किया गया।

मंगलवार को हनुमान जी की जन्म उत्सव का दिन था, सवेरे से ही भक्तगण हनुमान जी की जन्म उत्सव मनाने के लिए उत्सुक थे चारों तरफ झंडा रैली डीजे की धूम थी बिलासपुर में सैकड़ों संगठनो ने हनुमान जन्मोत्सव पर भव्य रैली निकालने की पहले से तैयारी कर चुके थे, गांव हो या शहर चारों तरफ हनुमान जन्मोत्सव की धूम थी। कहीं शरबत बांट रहे थे कहीं भंडारा कहीं पूरी सब्जी कहीं दूध से बने हुए मिठाइयां, भोग जिसकी जैसी श्रद्धा सब ने अपनी तरफ से कुछ ना कुछ इंतजाम कर रखा था शाम होते होते रैलियां बड़ा आकार लेने लगी।

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