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24 घंटे सेवा देने वाली मितानिनें अब अपने हक और सम्मानजनक मानदेय के लिए संघर्ष की राह पर

बिलासपुर छत्तीसगढ़ मितानिन यूनियन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री सहित स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है इस ज्ञापन में मितानिनों ने सम्मानजनक मानदेय लंबित प्रोत्साहन राशि के भुगतान और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं लागू करने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि वर्ष 2003 से आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और कोविड महामारी के दौरान भी अग्रिम पंक्ति में रहकर सेवाएं दीं। मितानिनों को न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप मानदेय नहीं मिल रहा है और प्रोत्साहन राशि का भुगतान भी नियमित रूप से नहीं हो पा रहा है। यूनियन ने राज्यांश 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने मासिक मानदेय 10 हजार रुपये करने तथा लंबित प्रोत्साहन राशि को कम से कम दोगुना कर भुगतान करने की मांग की है।मितानिनों ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसे भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा लागू करने की भी मांग उठाई है। इसके अलावा सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपये देने, आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में बीमा राशि का त्वरित भुगतान, तथा स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत मितानिनों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी शामिल है। यूनियन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगे आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।

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