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25 साल में खेती में परिवर्तन, पारंपरिक से हाईटेक तक पहुंचा बिलासपुर,ग्राफ्टेड पौधों से खेती हुई आसान, उत्पादन और आमदनी दोनों में बढ़ोतरी

छत्तीसगढ़ राज्य अपने स्थापना के 25वें वर्ष यानी रजत जयंती मना रहा है। इस अवसर पर बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिले के सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी 25 साल की उपलब्धियों का लेखा-जोखा तैयार करें यानी वर्ष 2000 में क्या था और 2025 में क्या बन गया। इसी क्रम में उद्यानिकी विभाग बिलासपुर ने अपनी 25 वर्षों की उपलब्धियों की जानकारी साझा की। विभाग ने बताया कि राज्य गठन के समय किसानों के पास पारंपरिक खेती के अलावा कोई विकल्प नहीं था। सीमित साधनों और प्राकृतिक तरीकों पर निर्भर किसान तब कठिन परिस्थितियों में खेती किया करते थे। अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। शासकीय उद्यानिकी केंद्र सरकंडा में आज रोग-निरोधक और स्वस्थ पौधों का उत्पादन किया जा रहा है। विभाग ने किसानों के बीच नई तकनीकें पहुंचाई हैं। खासकर ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार पौधे, जो रोग प्रतिरोधी और अधिक उत्पादन देने वाले हैं, किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं। इससे न केवल उत्पादन बढ़ा है बल्कि किसानों की आमदनी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। विभाग के प्रयासों से बिलासपुर जिले में अब पाली हाउस कल्चर को भी बढ़ावा मिला है। किसान अब गुलाब, गेंदा जैसे फूलों की खेती के साथ-साथ सब्जियों और फलों की हाइटेक खेती कर रहे हैं। पहले जहां खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर थी, वहीं अब वेजिटेबल सीड यूनिट्स के माध्यम से सालभर ताज़ी सब्जियों का उत्पादन हो रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और किसानों का रुझान आधुनिक खेती की ओर तेजी से बढ़ा है प्रदेश सरकार भी किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं चला रही है।प्रति एकड़ 25 सौ पौधों की क्राफ्टिंग पर विशेष अनुदान दिया जा रहा है।पारंपरिक खेती से आधुनिक तकनीक की ओर यह परिवर्तन छत्तीसगढ़ की रजत जयंती यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है, जिसने न केवल खेती बल्कि किसानों के जीवन की दिशा भी बदल दी है।

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