
बिलासपुर में प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। 1985 में अधिग्रहित की गई लगभग 546 एकड़ सरकारी जमीन आज तक राजस्व रिकॉर्ड में निजी नामों पर दर्ज है। इस गड़बड़ी के कारण अब मूल भू-स्वामी इसे निजी संपत्ति बताकर बेचने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया है।मामला सिरगिट्टी, परसदा और तिफरा क्षेत्र का है, जहां उद्योग विभाग ने करीब 221 हेक्टेयर भूमि उद्योग और तकनीकी संस्थान के लिए अधिग्रहित की थी। लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि राजस्व रिकॉर्ड आज तक अपडेट ही नहीं हुआ।

इस गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ जब कुछ लोग इस जमीन के लिए ऋण पुस्तिका बनवाकर निवेशकों को बेचने की तैयारी कर रहे थे।अधिकारियों के अनुसार यह लापरवाही उद्योग विभाग और राजस्व विभाग दोनों की चूक है। यदि समय पर नामांतरण कराया जाता तो अधिग्रहित जमीन की बिक्री का प्रयास कभी सामने नहीं आता। अब विभाग ने रिकॉर्ड मिलान और मूल दस्तावेज तलाशने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।इस मामले पर मुख्य महाप्रबंधक सी.आर. टेकाम ने स्वीकार किया कि प्रक्रिया वर्षों तक अपडेट न होना गंभीर त्रुटि है और अब सभी दस्तावेजों की जांच तेज़ की जा रही है। सवाल यह है कि 546 एकड़ सरकारी जमीन आखिर 40 साल तक कैसे निजी नामों में दर्ज रही और क्या इस लापरवाही पर जिम्मेदारी तय होगी।फिलहाल जांच और दस्तावेजों का सत्यापन जारी है।




