
सीपत क्षेत्र में एनटीपीसी अल्टीमेटम के खिलाफ जनआक्रोश खुलकर सामने आ गया है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने अपनी 24 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए प्रबंधन पर वादाखिलाफी भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय बैठकों में बनी सहमति का पालन नहीं किया गया। 692 पदों में से 152 पद आदिवासियों के लिए आरक्षित होने के बावजूद अब तक भर्ती नहीं होने भू-विस्थापितों को न्याय न मिलने और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता न देने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि ठेका मजदूरों को तय मजदूरी से कम भुगतान किया जा रहा है जबकि राखड़ डैम और परिवहन कार्यों में भ्रष्टाचार तथा फर्जी ट्रांसपोर्टरों को संरक्षण दिए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राखड़ उड़ने से बीमारियां बढ़ रही हैं लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। वहीं, भारी वाहनों के ओवरलोड संचालन से सड़कों की स्थिति खराब हो रही है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है। किसानों को मुआवजा भुगतान में देरी और सिंचाई नहरों की अनदेखी भी आक्रोश का कारण बनी हुई है जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को 8 मार्च तक का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिला तो 9 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी उनका कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से आंदोलन ही अंतिम विकल्प बचा है।




