श्रीकांत वर्मा मार्ग मैं रहने वाली समाजसेविका प्रियंका सिंह ने रविवार सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।अपना जीवन समाप्त करने से पहले प्रियंका सिंह ने अपने फेसबुक आईडी से एक वीडियो लाइव वायरल किया था, जिसमें उन्होंने आत्महत्या करने के पीछे कई रसूखदार लोगों को जिम्मेदार ठहराया था.घटना के दूसरे दिन पुलिस जांच के लिए मृतका के घर परिजनों का बयान दर्ज करने पहुंची थी.मगर अंत्येष्टि होने के कारण पुलिस वापस आ गई. इधर पूरे मामले के जांच अधिकारी सीएसपी निमितेश सिंह परिहार ने कहा कि मृतका ने अपने फेसबुक में जिन-जिन लोगों का नाम लिया है, उन सभी बिंदुओं पर बारीकी से जांच की जा रही है. इसके लिए जाँच टीम का भी गठन किया गया है।

आत्महत्या के इस मामले में मृतका ने पप्पू यादव, समर्पण क्लीनिक के संचालक डॉ अजीत मिश्रा, हाई कोर्ट एडवोकेट दीप्ती शुक्ला उनके पति कांग्रेस नेता अनिल शुक्ला, श्री राम ज्वेलर्स के संचालक विवेक उर्फ विक्की अग्रवाल , सांई मंदिर के पुजारी और उसके बेटे, नागूराव और उसकी पत्नी के ऊपर छेड़खानी और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया था. और इन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के लिए दोषी ठहराया था।फेसबुक पर लाइव आकर उसके बाद आत्महत्या कर लेने के इस मामले को पुलिस ने काफी गंभीरता से लिया है, जांच अधिकारियों का कहना है कि पूरे तथ्यों की तह तक जांच की जाएगी. और जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा. इस पूरे मामले में पुलिस जाँच के बाद एफआईआर दर्ज करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।

कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि प्रियंका सिंह के मकान पर कब्जा करने के लिए ही यह साजिश रची जा रही थी। तो वहीं अब तक प्रियंका सिंह की बेटी और पति की गतिविधियां भी काफी संदिग्ध बताई जा रही है। उनके अब तक के बयान आरोपियों के पक्ष में जाते नजर आ रहे हैं।




