
स्थानीय डी.पी. विप्र महाविद्यालय को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की डबल बैंच ने भी डी.पी. विप्र को आटोनॉमस घोषित किया अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की याचिका खारिज कर दी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने डी.पी. विप्र महाविद्यालय को उन्नीस जनवरी चौबीस को स्वशासी महाविद्यालय प्रदान की। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर को महाविद्यालय द्वारा अनेक पत्राचार कर संविधानिक निकाय एवं अधिसूचना हेतु प्रेषित किया गया परन्तु विश्वविद्यालय द्वारा किसी भी प्रकार के कार्यवाही न कर महाविद्यालय को लगातार भ्रमित, गुमराह तथा तथ्यहीन जानकारी देकर अधिसूचना जारी नहीं किया।

महाविद्यालय छात्रहित तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पत्र का सतत् प्रतिलिपि राज्यपाल, मंत्रियों को प्रेषित किया गया परन्तु कुलपति द्वारा राज्यपाल के पत्र का संज्ञान नहीं लिया गया तथा महाविद्यालय प्रत्येक फोरम पर असफल होने के पश्चात् छात्रहित को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के शरण में गया। न्यायालयीन प्रक्रिया के संपादन में समय व्यतीत होने के पश्चात् सिंगल बैंच द्वारा आठ मई को विश्वविद्यालय को अधिसूचना जारी करने तथा विश्वविद्यालय के प्रकरण को खारिज कर दिया।वही दो जुन को महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा विश्वविद्यालय का घेराव कर छात्रहित में अधिसूचना जारी किये जाने का निवेदन किया जिसे कुलपति द्वारा डबल बैंच में अपील पर जाने की बात कह कर टाल दी।

छात्र जगत में इस घटना से आक्रोश तथा पूरा छात्र जगत तथा पालक छत्तीसगढ़ के शिक्षा को हानि पहुँचाने वाला कुलपति मान लिया एवं भारत सरकार के नवीन शिक्षा नीति का विरोध के रूप में देखा जा रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय द्वारा 03 जून को डबल बैंच हेतु माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में अपील हेतु आवेदन किया जिसकी सुनवाई माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य न्यायाधीश के डबल बैंच ने 30 जून को सुनवाई कर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की याचिका खारिज कर डी.पी. विप्र महाविद्यालय को स्वशासी घोषित किया गया तथा इन्हें अधिसूचना जारी करने हेतु तत्काल आदेशित किया गया। अपने निर्णय में उन्होंने कहा कि जनवरी 2024 एवं सिंगल बैंच के द्वारा दिया गया 30 दिवस का अवधि पर्याप्त है।




