
गुरु को जीवन में श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि गुरु के माध्यम से ही जीवन को एक नई दिशा मिलती है और भविष्य में वे लाभदायक भी होता है एक गुरु वह होता है जो आपको शिक्षा प्रदान कर आपके जीवन को बेहतर बनाता है तो वही ऋषि मुनियों को भी गुरु का दर्जा देकर उन्हें पूजा जाता है तो वहीं साल में एक दिन गुरु पूर्णिमा का वह समय होता है जब सभी भक्त गुरु के पास पहुंचकर उनका पूजन करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।वैदिक पंचांग के अनुसार गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ तिथि के पूर्णिमा को मनाया जाता है।

इस शुभ अवसर पर शिष्य अपने गुरु का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा के दिन महर्षि वेदव्यास जी का अवतार हुआ था।इसलिए इस दिन हर साल गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इस पर्व को अपने गुरुओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। लास गुरुवार को आषाढ़ पूर्णिमा के मौके पर सभी भक्तजनों ने अपने गुरुजनों का पूजन करते हुए उनका आशीर्वाद लिया इस अवसर पर भंडारे का आयोजन कर भक्तों ने प्रसाद कभी वितरण किया गुरु शिष्य का या पवन महत्व पुरातन काल से चला रहा है जो आज भी कायम है दूर-दूर से भक्त अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं।




