
नगर निगम के वार्ड नंबर 46 गणेश नगर की हालत गुरुवार की बारिश के बाद ऐसी हो गई मानो कोई बस्ती नहीं, बल्कि जलमग्न क्षेत्र हो। सबसे हैरानी की बात ये है कि यह इलाका सीधे महापौर पूजा विधानी के वार्ड से सटा हुआ है, लेकिन बावजूद इसके न तो निगम का ध्यान यहां गया और न ही किसी जिम्मेदार ने यहां की भयावह स्थिति पर कोई ठोस कदम उठाया। वन विभाग का हिस्सा ऊंचाई पर और गणेश नगर का इलाका नीचा होने के चलते बारिश का पानी तेजी से बस्ती की ओर बह गया।वार्ड के पार्षद अब्दुल इब्राहिम खान ने बताया कि श्री राम मंदिर से लेकर शासकीय प्राथमिक शाला तक नाला निर्माण की योजना थी, लेकिन ठेकेदार ने अधूरा निर्माण कर काम बीच में ही छोड़ दिया। नतीजा ये हुआ कि नाले का पानी बस्ती में भर गया और घरों के अंदर तक पहुंच गया।गली-मोहल्ले में घुटनों तक पानी भर गया,बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इसी पानी में डूबते उतराते नजर आए।

स्कूली बच्चे पानी में जूते उठाए घर जाते दिखे, तो महिलाएं बाल्टी लेकर बरामदे से पानी निकालती रहीं।स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति की जानकारी निगम प्रशासन को पहले ही दी गई थी। खुद महापौर और निगम जोन कमिश्नर ने अधूरे नाले का निरीक्षण भी किया था, लेकिन उसके बाद भी निर्माण कार्य को आगे नहीं बढ़ाया गया। वार्डवासियों का गुस्सा अब उबाल पर है लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब महापौर अपने पड़ोस के ही वार्ड की अनदेखी कर सकती हैं, तो शहर के बाकी हिस्सों से क्या उम्मीद की जाए।कुल मिलाकर गणेश नगर की स्थिति नगर निगम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। लोग कह रहे हैं कि फोटो और उद्घाटन के कार्यक्रमों से हटकर जमीनी हकीकत को देखें महापौर, क्योंकि बाढ़ का पानी सिर्फ गली नहीं, भरोसे को भी बहा ले जा रहा है।




