
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े थोक किराना बाजार व्यापार विहार, बिलासपुर की हालत दिनों-दिन बद से बदतर होती जा रही है। करोड़ों का कारोबार, हजारों लोग, लेकिन सुविधाएं शून्य। सड़कें गड्ढों में बदल चुकी हैं, नालियों से बदबूदार पानी उफन रहा है और सफाई का नामोनिशान नहीं। हालत इतनी खराब हो चुकी है कि व्यापारी अब नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं। ये दृश्य किसी ग्रामीण या पिछड़े इलाके का नहीं, बल्कि उस व्यापार विहार का है, जहां रोजाना करोड़ों का कारोबार होता है।

बिलासपुर संभाग की इस सबसे बड़ी मंडी की हालत बारिश में और भी नारकीय हो जाती है। जर्जर सड़कों पर गड्ढे नहीं, गड्ढों में सड़कें हैं। नालियां बंद हैं, पानी दुकानों के अंदर घुस रहा है। लेकिन नगर निगम आंखें मूंदे बैठा है—शिकायत करो तो जवाब नहीं, समस्या बताओ तो बहाना मिलता है: “फंड नहीं आया।व्यापारियों का आरोप है कि सफाई कर्मी केवल दिखावे के लिए आते हैं। कई जगहों पर नालियों की सफाई के नाम पर गड्ढे खोद दिए गए लेकिन निकला कचरा वहीं छोड़ दिया गया, जिससे सड़कों पर कीचड़, गंदगी और दुर्गंध फैल रही है। बारिश में ग्राहक आना कम कर देते हैं, जिससे व्यापारियों को सीधे नुकसान उठाना पड़ रहा है।

व्यापारी ये भी कहते हैं कि नगर निगम से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सिर्फ आश्वासन मिला—अभी तक समाधान नहीं। व्यापार विहार की हालत पिछले 20-25 सालों से ऐसी ही है। न सड़कें बनीं, न नालियां बदलीं। नगर निगम को हर महीने 8 से 10 हज़ार रुपये टैक्स दिया जाता है, लेकिन उसके बदले सुविधाओं के नाम पर ‘शून्य’। न लाइट की व्यवस्था है, न जल निकासी की। कई बार व्यापारी खुद अपने खर्चे से नालियों की सफाई कराते हैं, ताकि कम से कम व्यापार चल सके। अब व्यापारियों का सब्र जवाब दे रहा है।

वे कह रहे हैं अब अगर निगम नहीं जागा, तो आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचेगा। करोड़ों रुपये की वसूली करने वाला निगम जब व्यापारियों की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं कर सकता, तो उसकी जवाबदेही क्या है? व्यापार विहार की बदहाली, बिलासपुर नगर निगम की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण बन चुका है। अब देखना ये होगा कि जनता के टैक्स से चलने वाली व्यवस्था कब जागेगी, या फिर व्यापारी खुद ही अपनी लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।




