
बिलासपुर की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मंगला क्षेत्र के धुरीपार मुख्य मार्ग की तस्वीरें देख कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि हालात कितने बदतर हो चुके हैं। सड़क के दोनों किनारों पर फैला कचरा, उठती बदबू और गंदगी का आलम – यह सब साफ बताता है कि नगर निगम और स्थानीय पार्षद सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित हैं। धुरीपार मार्ग, जो मंगला वार्ड क्रमांक 13 से होकर गुजरता है, आज एक अस्थायी कचरा डंपिंग ज़ोन में तब्दील हो चुका है।

ठेका कंपनी के कर्मचारी हर दिन ट्रकों में भरकर गीला-सूखा कचरा, यहां तक कि टॉयलेट की गंदगी भी इसी सड़क किनारे फेंक रहे हैं। परिणाम ये है कि आसपास के घरों तक बदबू पहुंच रही है और हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरा डंप करने की यह प्रक्रिया महीनों से चल रही है, लेकिन निगम की ओर से न तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई, न ही सफाई के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया।

हालात अब इस कदर बिगड़ चुके हैं कि बरसात में सड़कों पर कीचड़, बदबू और मरे हुए जानवर तक सड़ रहे हैं।इलाके में डेंगू, मलेरिया और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। छोटे बच्चे और बुज़ुर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं। लोग ना तो दरवाज़े खोल पा रहे हैं, और ना ही खुले में सांस ले पा रहे हैं। यह स्थिति न सिर्फ नागरिकों की सेहत बल्कि मानवीय गरिमा पर भी सवाल खड़ा करती है।

वार्ड पार्षद शिकायत कर रहे हैं, नगर निगम आश्वासन दे रहा है, लेकिन जमीनी हालात जस के तस हैं। सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल कागज़ों तक ही सीमित रहेगी? अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ये कचरा डंपिंग ज़ोन पूरे इलाके को बीमारियों का हॉटस्पॉट बना देगा।




