
बिलासपुर में जहां एक ओर “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत हरियाली बढ़ाने की कवायद चल रही है, वहीं दूसरी ओर हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने इस मुहिम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नारायणी हॉस्पिटल के सामने वर्षों पुराना एक घना पेड़ चुपचाप काट दिया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि गुरुवार सुबह उस पेड़ के ठूंठ को भी काटकर मिट्टी में दबा दिया गया। अब सवाल उठ रहा है क्या इस पेड़ को काटने की अनुमति ली गई थी। बिलासपुर का मुंगेली नाका रोड, जहां से मंगला चौक की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर नारायणी हॉस्पिटल स्थित है, वहीं पर खड़ा था एक बड़ा और घना हरा-भरा पेड़, जो अब केवल तस्वीरों में बचा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पेड़ को रातोंरात काट दिया गया और गुरुवार सुबह उसका ठूंठ भी हटाकर सड़क किनारे दबा दिया गया ताकि कोई निशान न बचे। पेड़ की उम्र और घनी छांव अब बीते कल की बात हो चुकी है।इस मामले को लेकर जब वन विभाग से बात की गई तो सहायक परिक्षेत्र अधिकारी जितेंद्र साहू ने कहा कि यदि पेड़ काटने की अनुमति नहीं ली गई है, तो यह वन अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है।

उन्होंने कहा कि बिना अनुमति किसी भी वृक्ष की कटाई पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग द्वारा मामले की जांच की जा रही है और दोषियों को चिन्हित किया जाएगा।एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियान पेड़ लगाने के साथ-साथ पेड़ों की रक्षा का संदेश भी देते हैं। यदि एक ओर पेड़ लगाए जा रहे हैं और दूसरी ओर हरे-भरे पेड़ों की कटाई हो रही है, तो फिर यह अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा। पेड़ सिर्फ सजावट का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं और इन्हें बचाना उतना ही ज़रूरी है जितना लगाना। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने कोई ठोस नीति बनाई जाती है या नहीं। फिलहाल नारायणी हॉस्पिटल के सामने कटा हुआ पेड़ शहर की हरियाली की ओर उठता एक गंभीर सवाल है क्या हम वाकई पेड़ों को बचाना चाहते हैं या केवल फोटो खिंचवाने तक ही पर्यावरण प्रेम सीमित है।




