
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले का एक गांव बस्ती — बाराद्वार, यहां एक रहस्यमयी डोंगा है… जिसे लोग सिर्फ लकड़ी की नाव नहीं मानते, बल्कि देवी का चमत्कारी रूप मानकर पूजते हैं। माना जाता है ये डोंगा आदिवासी भैंना राजा की कुलदेवी कंकालीन दाई से जुड़ा हुआ है।”यह रहस्यमयी डोंगा, जो न सिर्फ यहां के लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि चमत्कार और लोकविश्वास की जीती-जागती मिसाल भी है।इस डोंगा की बनावट भी उतनी ही रहस्यमयी है, जितनी इसकी कहानी।

इस डोंगा के तीन हिस्से हैं – एक ज़मीन पर है, दूसरा एक पुराने इमली के पेड़ में टंगा हुआ है, और तीसरा उसी पेड़ से सटा हुआ है।स्थानीय लोगों का मानना है कि ये “डोंगा” न तो ये हवा से गिरता है न बारिश से सड़ता है और न ही किसी ने आज तक इसे हटाने की हिम्मत की है। गांव वालों का विश्वास है कि यही डोंगा देवी कंकालीन दाई की शक्ति का प्रमाण है। स्थानीय पुजारी बताते हैं – यह डोंगा आदिवासी भैंना राजा की कुलदेवी, कंकालीन दाई का प्रतीक है। तभी तो इसे पूजा जाता है, और हर साल सैकड़ों श्रद्धालु मन्नतें लेकर यहां आते हैं।




