
बिलासपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 के पास स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में बीते 16 वर्षों से हर शनिवार को सुंदरकांड पाठ का आयोजन अनवरत जारी है। यह केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि स्टेशन परिसर में पनप रही एक जीवंत आध्यात्मिक परंपरा है, जिसे रेलवे कर्मचारी, अधिकारी, रिटायर्ड जन और आम श्रद्धालु मिलकर हर सप्ताह निभा रहे हैं। इस आयोजन की शुरुआत साल 2009 में हुई थी, और तब से लेकर आज तक एक भी शनिवार बिना सुंदरकांड पाठ के नहीं बीता।

यहां कोई पंडित नहीं, कोई कलाकार नहीं – सेवा भाव से जुड़ी टोली है, जो स्वेच्छा से श्रम, समय और धन समर्पित कर आयोजन को जीवित रखे हुए है। 2010 से हर मंगलवार भजन संध्या भी शुरू की गई, जहां स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्री भी कुछ देर रुककर भक्ति में डूब जाते हैं।इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह किसी संस्था या संगठन का नहीं, बल्कि जन-जन के सहयोग का परिणाम है।

कोई रेल कर्मचारी है तो कोई अधिकारी, कोई यात्री है तो कोई बुजुर्ग श्रद्धालु – सब एकसाथ मिलकर आयोजन को जीवन्त बनाए हुए हैं। लोगों का मानना है कि ईश्वर ही सबको जोड़ते हैं, और धर्म का यही स्वरूप समाज को समरसता का संदेश देता है। हनुमान मंदिर अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि स्टेशन के व्यस्त माहौल में भी शांति, समर्पण और एकता का प्रतीक बन चुका है। आयोजकों का संकल्प है कि यह सेवा बिना रुके, बिना थमे आगे भी यूं ही चलती रहे और राम नाम की गूंज हर शनिवार समाज को जोड़ने का माध्यम बनी रहे।




