
शासकीय प्राथमिक शाला सिंधी कॉलोनी में चल रहा शेड निर्माण कार्य अब बच्चों के लिए खतरे का कारण बनता जा रहा है। ठेकेदार की लापरवाही और मनमानी का खामियाजा मासूम छात्रों को भुगतना पड़ सकता है। स्कूल परिसर में मलबा, लोहे की छड़ें, औजार और निर्माण सामग्री खुलेआम बिखरी पड़ी है, जिसके बीच से होकर बच्चे रोज स्कूल में प्रवेश कर रहे हैं। स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब यह देखा जाता है कि बच्चे इसी मलबे और गंदगी के बीच बैठकर मिड-डे मील के बर्तन धो रहे हैं। इससे न केवल उनके स्वास्थ्य को खतरा है, बल्कि किसी भी वक्त कोई गंभीर हादसा हो सकता है।

परिसर में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। गौरतलब है कि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए 15 जून तक इसे पूरा करने के निर्देश दिए थे। लेकिन ठेकेदार द्वारा न तो समय सीमा का पालन किया गया और न ही कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जा रहा है। यह लापरवाही गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जा रही है। स्कूल प्रबंधन भी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है।

न तो बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है और न ही ठेकेदार की मनमानी पर कोई कार्रवाई की गई है। यह पूरा मामला साफ दर्शाता है कि जिम्मेदार विभाग और अधिकारी बच्चों की सुरक्षा को लेकर कितने असंवेदनशील हैं। सवाल यह उठता है कि क्या बच्चों की जान इतनी सस्ती हो गई है कि उन्हें खतरे के बीच पढ़ाई करने के लिए मजबूर किया जाए? अब देखना होगा कि प्रशासन कब नींद से जागता है और बच्चों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मुहैया कराता है।




