तेज़ रफ्तार ने मचाई कहर की तबाही, एक रात में 31 मवेशियों को रौंद गया मौत का हाईवा चकरभाठा, दर्रीघाट और कड़ार गांव में सड़कें बनी कत्लगाह, प्रशासन मौन

बिलासपुर ज़िले से दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है। बीती रात अलग-अलग जगहों पर तेज़ रफ्तार वाहनों ने 31 मवेशियों को बेरहमी से कुचल दिया। चकरभाठा थाना क्षेत्र के कड़ार गांव, दर्रीघाट और चकरभाठा रोड पर मवेशियों की लाशें सड़क पर बिखरी पड़ी थीं। ये सिर्फ हादसे नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की नंगी तस्वीर हैं। सबसे भयानक मंजर कड़ार गांव के मुख्य मार्ग पर देखने को मिला, जहां एक तेज़ रफ्तार अज्ञात हाईवा ने सड़क किनारे बैठे मवेशियों को रौंद दिया। हादसे में 19 मवेशियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं दर्रीघाट मार्ग पर 6 और चकरभाठा क्षेत्र में 6 मवेशी तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आकर मारे गए।सुबह जब लोग बाहर निकले तो सड़क पर खून से सने शव, टूटी हड्डियां और तड़पते जानवरों का मंजर देख दहल उठे।

कई घंटों तक न कोई पशु चिकित्सा टीम पहुंची और न ही प्रशासन का कोई प्रतिनिधि। एक घायल मवेशी की हालत गंभीर बनी हुई है और स्थानीय लोगों ने मिलकर उसका इलाज शुरू कराया।गांव वालों में आक्रोश है। उनका कहना है कि पहले भी कोटा रोड, बेलगहना और दर्रीघाट जैसे इलाकों में इस तरह के हादसे हो चुके हैं, लेकिन न कोई रिफ्लेक्टर लगते हैं, न रेस्क्यू टीम सक्रिय रहती है। हाईवा और भारी वाहनों की स्पीड बेलगाम है और रात्रि गश्त नाम मात्र की होती है।एएसपी अर्चना झा ने कहा कि पुलिस मौके पर पहुंचकर आसपास के CCTV कैमरों की जांच की जा रही है। वाहन की पहचान होते ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा सिर्फ एक गांव का मामला नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए एक चेतावनी है। कब तक मूक जानवर सड़क पर मरते रहेंगे।क्या मवेशियों की जान की कीमत जीरो है।जरूरत है अब जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग मिलकर कोई ठोस नीति बनाए, नहीं तो अगला हादसा और भी भयावह हो सकता है।

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