
रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण का 467 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। ठेकेदार इंजीनियर की गिरफ्तारी के बाद न केवल निर्माण कार्य पूरी तरह से रुक गया है, बल्कि स्टेशन की री-डेवलपमेंट योजना भी अधर में लटक गई है। यह प्रोजेक्ट तीन वर्षों में पूरा किया जाना था, मगर अब इसकी गति बेहद धीमी और अनिश्चित हो गई है।इस योजना के तहत मल्टी मॉडल इंटीग्रेशन, प्लेटफॉर्म विस्तार, लिफ्ट, एस्केलेटर, एयर कॉनकोर्स सहित कई अत्याधुनिक सुविधाएं प्रस्तावित हैं। लेकिन 37 लाख रुपये की रिश्वतखोरी के मामले में इंजीनियर की गिरफ्तारी ने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया है। गिरफ्तारी के बाद निर्माण कंपनी के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई, जिससे प्रोजेक्ट पर सीधा असर पड़ा है।रेलवे सूत्रों के अनुसार अब निर्माण एजेंसी के हर कदम पर निगरानी रखी जा रही है, जिससे काम बार-बार रुक रहा है। दस्तावेजों की सख्त जांच और ठेकेदार की अनुपस्थिति ने स्टेशन विकास की उम्मीदों पर ब्रेक लगा दिया है। यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं अब कागजों तक ही सीमित हैं।वहीं स्टेशन के गेट नंबर 3 को शेड से घेरकर लंबे समय से बंद किया गया है। कुछ दिन पहले यहां काम शुरू जरूर हुआ था, लेकिन फिर किसी कारणवश दोबारा बंद कर दिया गया। यह गेट यात्रियों की आवाजाही के लिए सबसे अहम था, जिससे रोजाना हजारों यात्री भीतर-बाहर होते थे। इसके बंद होने से यात्रियों को अन्य गेटों से प्रवेश में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धक्का मुक्की और भीड़भाड़ की स्थिति अब आम हो चुकी है, जिससे यात्री वर्ग में गहरी नाराजगी है।




