
सक्ती – छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले से ज़मीन विवाद का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
तहसील हसौद के ग्राम पिसौद की रहने वाली एक महिला पिछले 23 सालों से अपनी खरीदी हुई 16.31 एकड़ ज़मीन पर मालिकाना हक़ पाने के लिए दर-दर भटक रही है।पति की मौत के बाद महिला को न केवल दस्तावेज़ी अड़चनों का सामना करना पड़ा, बल्कि अब दबंगों की धमकियों से भी जूझना पड़ रहा है।साल 2001 में आशीष रात्रे के पति, स्व. सीताराम रात्रे ने ग्राम पिसौद स्थित खसरा नंबर 205, 226 और 209 सहित कई भूमि खंड कैथा निवासी विक्रेताओं से खरीदे थे। 2003 में इस सौदे की पुष्टि ₹50 के स्टांप पेपर पर गवाहों की मौजूदगी में की गई।महिला के पास आज भी वह स्टांप पेपर सुरक्षित है, जिसमें साफ़ तौर पर लिखा है कि आगे चलकर भूमि की रजिस्ट्री कराई जाएगी।लेकिन महिला का आरोप है कि विक्रेताओं ने जानबूझकर रजिस्ट्री नहीं कराई।इस बीच, ज़मीन बेचने वाले कई व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है, जिससे मामला और जटिल हो गया है।पीड़िता आशीष रात्रे का कहना है मैं पिछले कई वर्षों से लगातार थाना, कोर्ट, कलेक्टर कार्यालय और राजस्व विभाग में न्याय की गुहार लगा रही हूँ। लेकिन आज तक मुझे मेरे हक़ की ज़मीन का न्याय नहीं मिल सका है। इस दौरान मुझे शारीरिक और मानसिक रूप से भी परेशान किया जाता रहा है।”महिला का कहना है कि वे वर्षों से इस ज़मीन पर खेती-किसानी करती आ रही हैं, लेकिन अब कैथा निवासी रामरक्षित कश्यप उन्हें धमकाकर ज़मीन हड़पने की कोशिश कर रहा है।न्याय की आस में आशीष रात्रे ने पुलिस अधीक्षक सक्ती और कलेक्टर को आवेदन सौंपकर भूमाफियाओं के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की मांग की है।




