
बिलासपुर। मानसून के साथ ही बिलासपुर संभाग में जहरीले सांपों का आतंक बढ़ गया है। खेतों और घरों के आसपास सांपों की मौजूदगी से लोग अक्सर इनके शिकार हो रहे हैं। बीते 22 दिनों में सिम्स अस्पताल में सर्पदंश के 104 मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं। इनमें से 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी को समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बचाई जा सकी।विओ-1 सर्पदंश के मरीजों का सबसे ज्यादा आना ग्रामीण इलाकों से हो रहा है। बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर, कोटा और सीपत क्षेत्र में खेतों में काम करने के दौरान या घरों में पानी भरने, नाली साफ करने के वक्त लोग जहरीले सांपों के शिकार बन रहे हैं। कई मामलों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। सिम्स प्रबंधन ने जानकारी दी कि सर्पदंश के अधिकांश मरीज 12 से 60 वर्ष की उम्र के बीच हैं। अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्टाफ ने त्वरित उपचार कर 90 प्रतिशत मरीजों की जान बचाई है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बारिश शुरू होने से पहले ही डॉक्टरों और स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, जिससे समय पर उपचार संभव हो पा रहा है।बाईट- लखन सिंह (सिम्स अधीक्षक बिलासपुर)विओ-2 डॉक्टरों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई लोग झाड़-फूंक के चक्कर में समय गंवा देते हैं। ऐसे मामलों में मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है। विशेषज्ञों ने अपील की है कि सांप के काटने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें और किसी तरह का घरेलू इलाज या झाड़-फूंक न करें। सर्पदंश पीड़ितों को सिम्स में एंटी-वेनम इंजेक्शन और इमरजेंसी उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि समय पर अस्पताल पहुंचने से मरीज की जान आसानी से बचाई जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क करते हुए कहा है कि खेतों या बरसाती इलाकों में काम करते वक्त रबर के जूते पहनें, घरों की नालियों और आसपास की जगह साफ रखें और बच्चों को खुले में खेलने से बचाएं। बरसात के इस मौसम में लापरवाही भारी पड़ सकती है, इसलिए किसी भी स्थिति में झाड़-फूंक पर भरोसा न करें।




