
रेलवे के कोचिंग डिपो में शनिवार को दर्दनाक हादसा हुआ, जब मूलमुला निवासी 27 वर्षीय प्रताप बर्मन हाईटेंशन तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। इलाज के लिए अपोलो अस्पताल में भर्ती प्रताप की हालत नाजुक बनी हुई है। घटना के बाद परिजनों की शिकायत पर सिरगिट्टी पुलिस ने धारा 125 (बी) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।जानकारी के मुताबिक हादसे के समय बारिश होने के बाद काम रोक दिया गया था, लेकिन डिपो इंचार्ज एस.आर. मीना ने बिना जैमर बंद कराए प्रताप को बोगी पर चढ़ा दिया। ऊपर चढ़ते ही 25 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन से युवक करंट की चपेट में आ गया।

इतना ही नहीं, दुर्घटना के बाद एंबुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई गई और घायल को मालवाहक गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया गया।इस हादसे ने रेलवे की लापरवाही को उजागर कर दिया है। डिपो में काम कर रहे ठेका कर्मियों को न हेलमेट, न ग्लव्स और न ही दवा जैसी बुनियादी सुरक्षा सुविधाएं दी जाती हैं। हादसे के बाद रविवार को अधिकारियों और ठेकेदारों की मीटिंग हुई, जहां ठेका कर्मियों पर दबाव बनाया गया कि वे कार्य के दौरान अपनी जिम्मेदारी खुद स्वीकार करें और लिखित पत्र पर हस्ताक्षर करें।सूत्रों का कहना है कि डिपो में सुरक्षा से जुड़े उपकरण भी बंद पड़े थे। हुटर और माइक, जिनसे कर्मियों को खतरे की सूचना दी जाती थी, लंबे समय से काम नहीं कर रहे थे। हैरानी की बात है कि हादसे के कुछ ही घंटे बाद इन्हें फिर से चालू कर दिया गया। इससे साफ है कि रेलवे की भारी लापरवाही और दबाव की संस्कृति इस घटना की असली वजह है।




