26.1 C
Bilāspur
Monday, April 6, 2026
spot_img

कोटा ब्लॉक का परसापानी गांव अंधेरे में, आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित,,सियासत में गूंजा मुद्दा, अब गरमाई कांग्रेस-बीजेपी की जंग

बिलासपुर :- आजादी के 79 साल बाद भी कोटा ब्लॉक के परसापानी गांव की तस्वीर नहीं बदली। गांव के लोग आज भी सड़क, पुल, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। घने जंगल और पहाड़ों से घिरा यह गांव विकास के नाम पर उपेक्षा का शिकार है।गांव तक पहुंचने के लिए आज भी मुख्य मार्ग से चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। बरसात के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। गांव के बीच से बहने वाली नदी बारिश में उफान मारती है और दोनों ओर बसे ग्रामीणों का संपर्क टूट जाता है।

स्कूली बच्चों को माता-पिता कंधे पर उठाकर नदी पार कराते हैं।परसापानी के लोगों का कहना है कि गांव में पुल का निर्माण सबसे बड़ी जरूरत है। यही नहीं, यहां मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी है। न स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है और न ही रात में बिजली भरोसेमंद रहती है। हाथियों के गांव में घुस आने पर ग्रामीणों को अंधेरे में जान जोखिम में डालकर रात गुजारनी पड़ती है।गांव के पूर्व जनपद अध्यक्ष प्रत्याशी मुकुंद केरकेट्टा ने कहा कि हर चुनाव में नेताओं द्वारा बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई पलटकर नहीं देखता।

उन्होंने कहा कि परसापानी जैसे गांवों को स्मार्ट गांव की तरह विकसित करना होगा, तभी “सबका साथ, सबका विकास” का नारा सार्थक होगा।इन्हीं ज्वलंत समस्याओं को लेकर मुकुंद केरकेट्टा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नीलेश बिस्वास से मिले। बिस्वास ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे पहले जिला प्रशासन और उसके बाद मंत्री स्तर तक इस मुद्दे को उठाएंगे। जरूरत पड़ी तो आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जाएगा।नीलेश बिस्वास ने परसापानी की दुर्दशा देखकर नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि हजारों की आबादी वाला यह गांव अब भी बिजली, सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यह स्थिति बेहद शर्मनाक है और तत्काल सुधार की जरूरत है।उन्होंने विधायक अटल श्रीवास्तव पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय किए गए वादों को पूरा करने की बजाय वे परसापानी को भूल गए। बिस्वास ने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता के लिए होते हैं, और अगर वे ही संवेदनशील नहीं होंगे तो ऐसे नेता जनता को जवाब कैसे देंगे।परसापानी का मुद्दा अब राजनीति का केंद्र बन गया है।

कांग्रेस और बीजेपी पर ग्रामीणों ने उपेक्षा का आरोप लगाया है। बिस्वास ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब सरकार और जनप्रतिनिधि परसापानी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ें।ग्रामीणों का कहना है कि वे केवल झूठे वादे सुन-सुनकर थक चुके हैं। इस बार उनकी मांग साफ है—उन्हें सड़क, पुल, स्वास्थ्य और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं चाहिए। उनका कहना है कि अगर सरकार ने उनकी अनदेखी की तो वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

132,000FansLike
3,912FollowersFollow
21,600SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles